मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) के स्कूलों में नया शैक्षणिक सत्र शुरू हुए कई महीने बीत जाने के बावजूद हजारों विद्यार्थी कॉपियों, यूनिफॉर्म, स्कूल बैग और छातों से वंचित हैं। 31 जुलाई की तय समय सीमा बीतने के बाद भी आवश्यक शालेय वस्तुओं का वितरण पूरा नहीं होने पर बीएमसी शिक्षा समिति की बैठक में जमकर हंगामा हुआ। प्रशासन के ढुलमुल रवैये और ठेकेदारों का बचाव करने का आरोप लगाते हुए शिवसेना के नगरसेवकों ने विरोध जताया और बैठक से वॉकआउट कर दिया।

बैठक में नगरसेवकों ने विद्यार्थियों को छाते मिलने में हुई देरी पर प्रशासन से सवाल किया। इस पर शिक्षा उपायुक्त प्राची जांभेकर ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जारी युद्ध की स्थिति के कारण ठेकेदार समय पर छातों की आपूर्ति नहीं कर सका। प्रशासन की ओर से दिए गए इस कारण पर नगरसेवक हैरान रह गए।

बीएमसी प्रशासन का दावा है कि अधिकांश शालेय सामग्री विद्यार्थियों को वितरित की जा चुकी है, लेकिन उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार बड़ी संख्या में बच्चे अब भी आवश्यक वस्तुओं का इंतजार कर रहे हैं। करीब 38 प्रतिशत विद्यार्थियों को स्कूल बैग और लगभग 49 प्रतिशत बच्चों को अब तक छाते या रेनकोट नहीं मिले हैं।

शिवसेना नगरसेवक अंकित प्रभु और प्रमोद सावंत ने प्रशासन के रवैये पर सवाल उठाते हुए कहा कि अर्धवार्षिक परीक्षाएं नजदीक हैं और बच्चों के पास कॉपियां तक नहीं हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि समय पर सामग्री उपलब्ध नहीं कराने वाले ठेकेदारों पर कार्रवाई करने के बजाय प्रशासन उनका बचाव कर रहा है।

बैठक में बीएमसी स्कूलों में दिए जाने वाले मिड-डे मील की गुणवत्ता का मुद्दा भी उठा। विद्यार्थियों को खराब और अधपका खाना मिलने की शिकायतों के बाद संबंधित ठेकेदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की गई।

शैक्षणिक सत्र के कई महीने बीतने और निर्धारित 31 जुलाई की समय सीमा समाप्त होने के बावजूद विद्यार्थियों तक आवश्यक शालेय सामग्री पूरी तरह नहीं पहुंचना बीएमसी की वितरण व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। शिक्षा समिति की बैठक में हुआ हंगामा और शिवसेना नगरसेवकों का वॉकआउट इसी मुद्दे पर प्रशासन से जवाबदेही की मांग को रेखांकित करता है।

Pratahkal Newsroom

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