बीएमसी स्कूल सामान टेंडर विवाद: कांग्रेस का बिचौलियों से सप्लाई का आरोप
जेम पोर्टल के जरिए मूल निर्माताओं को हटाकर सप्लायरों को फायदा पहुंचाने का आरोप, कांग्रेस गटनेता अशरफ आजमी ने बीएमसी कमिश्नर से की उच्च स्तरीय जांच की मांग।

बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) के स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को मिलने वाली मूलभूत सुविधाओं और वस्तुओं की आपूर्ति को लेकर एक नया और बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। बीएमसी मुख्यालय के पत्रकार संघ में आयोजित एक महत्वपूर्ण संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए बीएमसी में कांग्रेस पार्टी के गटनेता अशरफ आजमी ने बीएमसी प्रशासन की कार्यप्रणाली पर बेहद गंभीर और सनसनीखेज आरोप लगाए हैं। उन्होंने सीधे तौर पर प्रशासनिक पारदर्शिता को कटघरे में खड़ा करते हुए कहा कि बीएमसी ने यह बड़ा दावा करते हुए 'जेम' (GeM) पोर्टल को लागू किया था कि इससे बिना किसी बिचौलिए के सीधे असली निर्माताओं (मैन्युफैक्चरर्स) से स्कूली सामानों की खरीदारी सुचारू रूप से की जा सकेगी। हालांकि, जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट नजर आ रही है क्योंकि जेम पोर्टल से असली उत्पादक अब पूरी तरह गायब हो चुके हैं और वर्तमान में भी 'मिडिलमैन' यानी बिचौलियों के माध्यम से ही स्कूली वस्तुओं की सप्लाई धड़ल्ले से की जा रही है।
इस कथित प्रशासनिक घालमेल को उजागर करने के लिए कांग्रेस नेता अशरफ आजमी ने मानसून के मौजूदा मौसम में स्कूली बच्चों को बांटी जाने वाली छतरियों की खरीद का प्रत्यक्ष उदाहरण देते हुए बीएमसी प्रशासन को पूरी तरह से घेरा। उन्होंने मामले का विस्तृत विवरण देते हुए बताया कि छतरी की सप्लाई के लिए जेम पोर्टल पर बाकायदा टेंडर आमंत्रित किए गए थे, जिसमें कुल तीन सप्लायर सामने आए थे। लेकिन टेंडर की शर्तों की अत्यधिक जटिलता के कारण उनमें से केवल एक ही ठेकेदार को पात्र घोषित किया गया। ऐसी स्थिति में अब यह गंभीर सवाल उठता है कि ऐन बारिश के मौसम में बच्चों तक समय पर छतरियां आखिर कैसे पहुंच पाएंगी। उन्होंने तीखा आरोप लगाया कि सत्ताधारी भाजपा के इशारे पर ही 'महाटेंडर' प्रणाली को हटाकर जेम पोर्टल को अपनाया गया था, लेकिन इन दोनों प्रणालियों की नियम और शर्तें पूरी तरह अलग होने की वजह से बाजार में कोई भी स्वस्थ प्रतिस्पर्धा पैदा ही नहीं हो पाई। इसका सीधा नतीजा यह हुआ कि पिछली बार की तरह इस बार भी पुराने पसंदीदा ठेकेदारों को ही पिछले दरवाजे से अनुचित फायदा पहुंचाया जा रहा है।
इस पूरी टेंडर प्रक्रिया में बड़े स्तर पर वित्तीय और प्रशासनिक गड़बड़ी का दावा करते हुए कांग्रेस नेता ने एक चौंकाने वाला तथ्य सामने रखा कि बीएमसी के स्कूली बच्चों के लिए छतरी सप्लाई करने का यह अहम ठेका कोलकाता के एक सप्लायर को दे दिया गया है, जबकि छतरी बनाने वाली प्रसिद्ध 'सन कंपनी' खुद मुंबई में ही मौजूद है। ऐसे में सीधे मूल निर्माता से वस्तु खरीदने के बजाय सप्लायर को बीच में लाकर बीएमसी को भारी आर्थिक नुकसान पहुंचाया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यही चिंताजनक हाल कॉपियों और रेनकोट की खरीद में भी साफ देखा जा रहा है, जहां असली निर्माताओं के बजाय केवल बिचौलिए और सप्लायर ही पूरी व्यवस्था पर हावी हैं। अशरफ आजमी ने आरोप मढ़ा कि बीएमसी के कुछ अधिकारियों ने मिलीभगत के तहत जानबूझकर ऐसी जटिल शर्तें बनाईं जिससे पुराने ठेकेदारों को ही दोबारा काम मिल सके। कांग्रेस ने अब इस पूरे घालमेल को लेकर बेहद आक्रामक रुख अख्तियार कर लिया है और बीएमसी कमिश्नर अश्विनी भिड़े से इस कथित घोटाले की उच्च स्तरीय व निष्पक्ष जांच कराने की कड़ी मांग की है। इस पूरे घटनाक्रम ने बीएमसी की खरीद प्रणाली की विश्वसनीयता पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है, जिससे आने वाले दिनों में यह राजनीतिक टकराव और तेज होना तय है।

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