मुंबई महानगरपालिका के शिक्षा विभाग के दावों के बावजूद जुलाई का महीना समाप्त होने की कगार पर है, लेकिन पालिका स्कूलों में पढ़ने वाले 2 लाख 98 हजार से अधिक विद्यार्थियों को अभी तक स्कूल किट नहीं मिल सकी है। जून महीने के अंत तक सभी विद्यार्थियों को शैक्षणिक सामग्री वितरित करने का दावा किया गया था, लेकिन अब तक बड़ी संख्या में बच्चे यूनिफॉर्म, सैंडल, छतरी, रेनकोट, कॉपियां और स्कूल बैग जैसी जरूरी सामग्री से वंचित हैं।

भारी बारिश के बीच भी पालिका स्कूलों के विद्यार्थी बिना रेनकोट, सैंडल और अन्य आवश्यक वस्तुओं के स्कूल पहुंचने को मजबूर हैं। शैक्षणिक सामग्री की इस कमी से गरीब और जरूरतमंद छात्रों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इस मुद्दे को लेकर मुंबई महानगरपालिका की शिक्षा समिति की बैठक में विपक्ष ने प्रशासन को घेरा और सामग्री वितरण में हो रही देरी पर तीखे सवाल उठाए।

शिक्षा समिति की बैठक में सामग्री वितरण में देरी को लेकर चर्चा हुई। समिति की अध्यक्षता कर रहे प्रतिनिधियों ने देरी को स्वीकार किया, जबकि प्रशासनिक अधिकारियों ने अपनी ओर से स्थिति स्पष्ट करने का प्रयास किया। बैठक के दौरान नगरसेविका कामरजहां मोईन ने इस मुद्दे पर कड़ा विरोध दर्ज कराया। उन्होंने कहा कि मूसलाधार बारिश में भी पालिका स्कूलों के बच्चों के पास न तो छाता है और न ही रेनकोट, जिससे उन्हें काफी परेशानी उठानी पड़ रही है।

शिवसेना नगरसेवक अंकित प्रभु ने बैठक में बताया कि लगभग 2 लाख 98 हजार विद्यार्थी अब तक स्कूल किट से पूरी तरह वंचित हैं। उन्होंने कहा कि बच्चों को अभी तक यूनिफॉर्म, सैंडल और छतरी नहीं मिल पाई है। बीएमसी की ओर से दी जाने वाली 27 तरह की वस्तुओं के आधार पर ही इन बच्चों की पढ़ाई चलती है। उन्होंने मांग की कि ‘जेम’ पोर्टल के माध्यम से होने वाली खरीद प्रक्रिया के लिए एक निश्चित समय सीमा तय की जानी चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी देरी न हो।

नगरसेवक प्रमोद सावंत ने भी इस मामले पर प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि आज की तारीख तक 90 प्रतिशत छात्रों को आवश्यक वस्तुएं नहीं मिली हैं और इस लापरवाही का सीधा असर बच्चों के भविष्य पर पड़ रहा है।

बैठक में अन्य सदस्यों ने भी प्रशासनिक देरी को लेकर सवाल उठाए। नगरसेविका सोनाली साबे ने पूछा कि जब स्कूल शुरू हुए दो महीने बीत चुके हैं तो जेम पोर्टल की प्रक्रिया समय रहते क्यों शुरू नहीं की गई। उन्होंने यह भी सवाल किया कि यदि विक्रेता सामान की आपूर्ति करने में असमर्थ था तो बच्चों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था क्यों नहीं की गई।

नगरसेविका पूजा महाडेश्वर ने चिंता जताते हुए कहा कि अगस्त महीने से परीक्षाएं शुरू होने वाली हैं। ऐसे में अगर बच्चों को किताबें और कॉपियां ही नहीं मिलेंगी तो वे पढ़ाई कैसे करेंगे।

विपक्ष के आरोपों और बैठक में हुए हंगामे के बाद शिक्षा विभाग की उपायुक्त प्राची जांभेकर ने आश्वासन दिया कि प्रशासन इस प्रक्रिया में तेजी ला रहा है। उन्होंने कहा कि आगामी 31 जुलाई तक सभी विद्यार्थियों को बची हुई शैक्षणिक सामग्री का वितरण पूरा करने पर विशेष जोर दिया जाएगा। अब प्रशासन के सामने तय समय सीमा में सभी पालिका विद्यार्थियों तक स्कूल किट पहुंचाने की चुनौती है।

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