मुंबई में सीवरेज प्रणाली के पुराने प्रोजेक्ट से जुड़े आरवी एंडरसन एसोसिएट्स मामले में बीएमसी प्रशासन की कानूनी रणनीति पर सवाल उठने लगे हैं। बीएमसी में कांग्रेस के नेता अशरफ आजमी ने मामले की जांच की मांग करते हुए आरोप लगाया है कि गलत कानूनी सलाह और अधिकारियों की लापरवाही के कारण साल 2010 का पुराना विवाद आज मुंबई के करदाताओं पर भारी आर्थिक बोझ बन चुका है।

सीवरेज प्रोजेक्ट का काम साल 2001 में ही पूरा हो गया था, लेकिन बकाया भुगतान को लेकर शुरू हुआ कानूनी विवाद वर्षों तक अदालतों में चलता रहा। अशरफ आजमी के अनुसार, साल 2010 में मध्यस्थता अदालत ने बीएमसी को विदेशी मुद्रा और भारतीय रुपयों में राशि का भुगतान करने का फैसला सुनाया था। इस राशि पर 14 प्रतिशत सालाना ब्याज भी तय किया गया था।

मध्यस्थता अदालत के फैसले के खिलाफ बीएमसी ने हाईकोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट का रुख किया, लेकिन दोनों जगह बीएमसी की याचिका खारिज हो गई। इस लंबी कानूनी लड़ाई के दौरान अमेरिकी डॉलर की कीमत साल 2004 के 45 रुपये से बढ़कर आज करीब 96 रुपये तक पहुंच गई।

आजमी ने कहा कि विदेशी मुद्रा की दरों में बढ़ोतरी और 14 प्रतिशत ब्याज जुड़ने से बीएमसी की देनदारी कई गुना बढ़ चुकी है। उन्होंने इस मामले में सवाल उठाया कि बीएमसी को अदालत में बार-बार केस लड़ने की सलाह किसने दी थी और इस पूरी प्रक्रिया में शामिल अधिकारियों की क्या भूमिका थी।

अशरफ आजमी ने मांग की है कि आरवी एंडरसन एसोसिएट्स मामले की पूरी वित्तीय और कानूनी जांच कराई जाए। उन्होंने इसके साथ ही बीएमसी के खिलाफ अदालतों में लंबित अन्य सभी बड़े मामलों की पूरी जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की है, ताकि मुंबई के करदाताओं के पैसों की इस तरह की बर्बादी को रोका जा सके।

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Pratahkal Bureau

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