बीएमसी नियमों का उल्लंघन: वाकोला में मानसून पूर्व सड़क खुदाई पर विवाद
आयुक्त के निर्देशों के बावजूद दत्त मंदिर रोड पर खुदाई और घटिया निर्माण से सीवरेज लाइन क्षतिग्रस्त, भाजपा ने लगाया भ्रष्टाचार का आरोप।

मुंबई में मानसून की दस्तक से पहले प्रशासनिक लापरवाही और भ्रष्टाचार का एक गंभीर प्रकरण प्रकाश में आया है। बीएमसी आयुक्त अश्विनी जोशी और अतिरिक्त आयुक्त अभिजीत बांगर द्वारा जारी स्पष्ट निर्देशों, जिसमें मानसून पूर्व तैयारियों के मद्देनजर 15 मई के बाद डामर की सड़कों के निर्माण हेतु किसी भी प्रकार की खुदाई पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया था, की खुलेआम अवहेलना की जा रही है। वाकोला स्थित दत्त मंदिर रोड पर नियमों को ताक पर रखकर सड़क की खुदाई का कार्य धड़ल्ले से जारी है। इस मामले को लेकर भाजपा प्रवक्ता एवं बेस्ट समिति सदस्य अजय सिंह ने अतिरिक्त आयुक्त को पत्र लिखकर संबंधित अधिकारियों और ठेकेदारों के विरुद्ध कठोर दंडात्मक कार्रवाई की मांग की है।
अजय सिंह के अनुसार, दत्त मंदिर रोड पर 'यूटिलिटी डक्ट' बिछाने का कार्य अत्यंत निम्न स्तर पर किया जा रहा है, जिसमें निर्माण के आवश्यक मानकों जैसे स्टील और शटरिंग की घोर अनदेखी की गई है। इस लापरवाही का दुष्परिणाम यह हुआ है कि क्षेत्र की मुख्य सीवरेज लाइन क्षतिग्रस्त हो गई है, जिससे 'साई सिद्धि अन्नदाता आहार केंद्र' के समीप गंदगी का अंबार लग गया है। इस स्थिति ने जरूरतमंदों को परोसे जाने वाले भोजन की स्वच्छता और जनस्वास्थ्य पर गंभीर संकट उत्पन्न कर दिया है। सिंह ने शासन की मंशा पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि जब सरकार की नीति संपूर्ण मुंबई को 'सीसी रोड' के माध्यम से गड्ढा मुक्त बनाने की है, तो इस निचले इलाके में डामर की सड़क का निर्माण क्यों किया जा रहा है? उन्होंने इसे करदाताओं के धन की खुली लूट बताते हुए इंजीनियरों और ठेकेदारों की मिलीभगत से संचालित एक बड़े घोटाले की संज्ञा दी है।
दूसरी ओर, बीएमसी के संबंधित विभाग ने अपने बचाव में तर्क दिया है कि डामर की सड़कों के लिए खुदाई की समयसीमा वास्तव में 31 मई तक है। अधिकारियों का दावा है कि वे सीवरेज विभाग के टेंडर की प्रतीक्षा नहीं कर सकते क्योंकि उसमें अत्यधिक विलंब की संभावना है, अतः 31 मई से पूर्व सड़क का कार्य पूर्ण कर लिया जाएगा। हालांकि, स्थानीय निवासियों और जनप्रतिनिधियों ने इस दावे को खारिज करते हुए आशंका जताई है कि मानसून की प्रारंभिक वर्षा में ही यह घटिया निर्माण पूरी तरह बह जाएगा। इससे न केवल सार्वजनिक धन की बर्बादी होगी, बल्कि आगामी मानसून में स्थानीय जनता को भारी दुश्वारियों और जलजमाव का सामना करना पड़ेगा।

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