बीएमसी की अनोखी पहल: पीओपी मूर्तियों के कचरे का होगा वैज्ञानिक पुनर्चक्रण
मुंबई में गणेशोत्सव के बाद विसर्जित पीओपी मूर्तियों के अवशेषों से अब नई वस्तुएं बनाई जाएंगी, अकर्मा फाउंडेशन को प्रायोगिक आधार पर 20.44 लाख का प्रोजेक्ट मिला।

मुंबई की जीवनरेखा माने जाने वाले गणेशोत्सव और अन्य प्रमुख त्योहारों के बाद मूर्तियों के विसर्जन से उत्पन्न होने वाले प्रदूषण को नियंत्रित करने हेतु बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) ने एक अत्यंत अनूठा और वैज्ञानिक मार्ग प्रशस्त किया है। बॉम्बे हाई कोर्ट द्वारा जनहित याचिका संख्या 96 के अंतर्गत प्रदत्त निर्देशों का अनुपालन सुनिश्चित करते हुए, महानगरपालिका प्रशासन ने विसर्जित प्लास्टर ऑफ पेरिस (पीओपी) की मूर्तियों के अवशेषों का पर्यावरण-अनुकूल पुनर्चक्रण करने का निर्णायक निर्णय लिया है। इस महत्वाकांक्षी एवं वैज्ञानिक परियोजना को प्रायोगिक आधार पर क्रियान्वित करने की जिम्मेदारी सामाजिक संस्था 'सर्वश्री अकर्मा फाउंडेशन' को सौंपी गई है, जिसके लिए कुल 20,44,000 रुपये का व्यय निर्धारित किया गया है।
इस योजना के तहत, त्योहारों के पश्चात विसर्जित मूर्तियों के मलबे से लगभग 10 टन पीओपी सामग्री को वैज्ञानिक पद्धति द्वारा पृथक कर विघटित किया जाएगा। तदोपरांत, रीप्रोसेसिंग तकनीक के माध्यम से इस कचरे को उपयोगी उत्पादों में रूपांतरित किया जाएगा, ताकि पर्यावरण को क्षति पहुँचाए बिना कचरे का समुचित निपटारा संभव हो सके। अकर्मा फाउंडेशन नाशिक में एक वृहद प्रोसेसिंग सेंटर संचालित करती है, जहाँ संस्था अब तक 350 टन से अधिक पीओपी मूर्तियों के अवशेषों का सफलतापूर्वक प्रसंस्करण कर चुकी है। संस्था के इसी अनुभव से प्रभावित होकर, उन्होंने बीएमसी के अतिरिक्त आयुक्त के समक्ष अपनी वैज्ञानिक कार्यप्रणाली का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया था।
तकनीक और विशेषज्ञता के मूल्यांकन उपरांत, अतिरिक्त आयुक्त ने प्रायोगिक तौर पर 10 टन कचरे के पुनर्चक्रण का कार्य अकर्मा फाउंडेशन को सौंपने की औपचारिक स्वीकृति प्रदान कर दी है। इस तकनीक के माध्यम से भविष्य में पीओपी मूर्तियों के पुनर्चक्रण और उनके जल में तीव्र घुलनशीलता हेतु वैज्ञानिक अनुसंधान भी किए जाएंगे। यद्यपि राज्य सरकार द्वारा गठित विशेषज्ञ वैज्ञानिक समिति से इस विषय पर अंतिम मार्गदर्शक दिशा-निर्देशों की प्रतीक्षा है, तथापि बीएमसी द्वारा उठाया गया यह ठोस कदम मुंबई को स्वच्छ एवं हरित बनाने की दिशा में एक अनुकरणीय मिसाल स्थापित करता है।

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