मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) की राजनीति में एक बार फिर सियासी पारा अपने चरम पर है। मुंबई की महापौर रितू तावडे ने एक महत्वपूर्ण बयान देकर राजनीतिक गलियारों में खलबली मचा दी है। ठाकरे गुट के 45 पूर्व नगरसेवकों के शिंदे सेना में शामिल होने की चर्चाओं पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए महापौर ने स्पष्ट किया कि यदि ठाकरे गुट के सदस्य मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व पर विश्वास जताते हुए गठबंधन में शामिल होना चाहते हैं, तो उनका स्वागत है। उन्होंने आत्मविश्वास के साथ कहा कि आगामी दिनों में बीएमसी में गठबंधन का संख्या बल और अधिक सुदृढ़ होने वाला है।

महापौर ने विपक्ष द्वारा महापौर पद की दावेदारी पर चुटकी लेते हुए कहा कि लोकतंत्र में महत्वाकांक्षा रखना सबका अधिकार है, लेकिन धरातल की वास्तविकता और स्वप्न में काफी अंतर होता है। राजनीतिक रणनीतियों का उल्लेख करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि बीएमसी में 'ऑपरेशन टाइगर' के साथ-साथ भारतीय जनता पार्टी का 'ऑपरेशन लोटस' भी पूरी सक्रियता से कार्य कर रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि 'ऑपरेशन टाइगर' की सफलता में 'लोटस' का सहयोग अनिवार्य है। इसके साथ ही, उन्होंने संकेत दिया कि भविष्य में शिवसेना-बीजेपी के अलावा अन्य छोटे दलों के कई नगरसेवक भी गठबंधन में शामिल हो सकते हैं।

प्रशासनिक और कानूनी पहलुओं पर चर्चा करते हुए महापौर ने भांडुप के एक नगरसेवक के जाति प्रमाणपत्र वैधता विवाद पर स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने बताया कि इस मामले की जांच के लिए एक समर्पित समिति का गठन किया गया है। महापौर ने स्पष्ट किया कि यदि समिति के निर्णय के बाद किसी का जाति प्रमाणपत्र कानूनी रूप से अवैध घोषित होता है, तो संबंधित व्यक्ति का नगरसेवक पद तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया जाएगा। इस बयान से यह संकेत मिलता है कि मुंबई की स्थानीय राजनीति में आगामी चुनावों से पूर्व एक बड़े फेरबदल की भूमिका तैयार हो चुकी है।

Pratahkal Newsroom

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