मुंबई जल सुरक्षा: बीएमसी बिछाएगी 51 किमी लंबी नई पाइपलाइन
70 साल पुरानी जलवाहिनियों के विकल्प के रूप में टाटा कंसल्टिंग इंजीनियर्स को मिला भिवंडी से जांभिवली चरण का परियोजना प्रबंधन काम।

भविष्य में मुंबईकरों को पानी की किल्लत से बचाने और शहर की जल सुरक्षा को अभेद्य बनाने के उद्देश्य से बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण और दूरगामी परियोजना को हरी झंडी दे दी है। बीएमसी की स्थायी समिति के ताजा दस्तावेजों के अनुसार, गुंदवली जलसुरंग के कूपिका वाई-जंक्शन से लेकर डोमपर्यात तक लगभग 51.438 किलोमीटर लंबी और 3000 मिलीमीटर व्यास वाली विशाल स्टील की नई जलवाहिनी बिछाने का खाका तैयार किया गया है।
इस परियोजना के तहत पहले चरण में भिवंडी से जांभिवली एंकर ब्लॉक तक के कार्य की निविदा प्रक्रिया, डिजाइनिंग और प्रारंभिक सर्वेक्षण के प्रबंधन के लिए ‘मेसर्स टाटा कंसल्टिंग इंजीनियर्स लिमिटेड’ को परियोजना प्रबंधन सलाहकार नियुक्त किया गया है। इसके लिए कंपनी को 5,33,69,050 रुपये का सेवा शुल्क प्रदान किया जाएगा। प्रशासनिक रिपोर्ट के अनुसार, इस पूरे प्रोजेक्ट को ‘डिजाइन एंड बिल्ड’ मॉडल पर अमल में लाया जा रहा है।
वर्तमान में तानसा से गुंदवली मार्ग पर वैतरणा और अपर वैतरणा जैसी प्रमुख जलवाहिनियों का उपयोग हो रहा है, जिनकी आयु क्रमशः 70 वर्ष और 54 वर्ष से अधिक हो चुकी है। पुरानी संरचना के कारण इन पाइपलाइनों में उच्च जलदाब सहन करने की क्षमता कम हो गई है। इनके फटने की स्थिति में आसपास के क्षेत्रों में बाढ़ आने और भांडुप जल शुद्धीकरण केंद्र की आपूर्ति ठप होने का गंभीर जोखिम बना रहता है।
इसी गंभीर स्थिति को देखते हुए बीएमसी कमिश्नर के निर्देश पर इस नई समानांतर जलवाहिनी परियोजना को अमल में लाया जा रहा है, ताकि आपातकालीन परिस्थितियों में एक मजबूत विकल्प उपलब्ध हो सके। परियोजना को दो विभागों में विभाजित किया गया है, जिसके अंतर्गत टाटा कंसल्टिंग टोटल स्टेशन सर्वे, सॉइल इन्वेस्टिगेशन, ड्राफ्ट टेंडर तथा ट्री सर्वे का कार्य भी संभालेगी।
स्थानीय नगरसेवकों ने बीएमसी के इस दूरदर्शी कदम की सराहना की है। उनका कहना है कि बढ़ती आबादी के लिए जल सुरक्षा अत्यंत संवेदनशील विषय है और पुरानी पाइपलाइनों पर पूरी व्यवस्था को निर्भर नहीं छोड़ा जा सकता था। नगरसेवकों ने यह भी मांग की है कि परियोजना के दौरान पर्यावरण और पेड़ों का विशेष ध्यान रखा जाए तथा कार्य निर्धारित समय सीमा में पूर्ण किया जाए, ताकि भविष्य में मुंबई को बिना किसी तकनीकी बाधा के चौबीसों घंटे शुद्ध जल आपूर्ति सुनिश्चित हो सके।
यह परियोजना मुंबई की जल आपूर्ति प्रणाली को दीर्घकालिक मजबूती प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है, जो आने वाले वर्षों में शहर की जल सुरक्षा संरचना को नई स्थिरता प्रदान कर सकती है।

Pratahkal Bureau
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