देश की आर्थिक राजधानी मुंबई को पूर्णतः स्वच्छ और कचरा-मुक्त बनाने के उद्देश्य से बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) ने केंद्र सरकार के ठोस कचरा प्रबंधन नियम, 2026 तथा माननीय सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुपालन में एक व्यापक और सख्त महा-अभियान की शुरुआत की है। रोजाना लगभग 7,200 मीट्रिक टन कचरा उत्पन्न करने वाले इस महानगर में अब कचरा प्रबंधन को डिजिटल और वैज्ञानिक प्रणाली से संचालित किया जाएगा।

बीएमसी कमिश्नर अश्विनी भिडे तथा अतिरिक्त आयुक्त अश्विनी जोशी के मार्गदर्शन में तैयार की गई इस नई नीति के तहत मुंबईकरों के लिए घरों और सोसायटियों में कचरे का चार श्रेणियों में पृथक्करण अनिवार्य कर दिया गया है, जिसमें गीला कचरा, सूखा कचरा, सैनिटरी कचरा और ‘स्पेशल केयर वेस्ट’ शामिल हैं। इस व्यवस्था का उद्देश्य कचरा निस्तारण को अधिक प्रभावी और पर्यावरण-सुरक्षित बनाना है।

सैनिटरी वेस्ट जैसे नैपकिन और डायपर के सुरक्षित निपटारे के लिए बीएमसी ने अप्रैल 2025 से क्यूआर कोड-आधारित विशेष पंजीकरण सेवा शुरू की है, जिसके तहत अब तक 7,800 से अधिक सोसायटियां और संस्थान पंजीकृत हो चुके हैं। इन संस्थानों को पीले रंग के विशेष बैग और डस्टबिन उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जिन्हें बीएमसी की गाड़ियां नियमित रूप से एकत्र कर प्लाज्मा इंसिनरेशन प्लांट में वैज्ञानिक तरीके से नष्ट करती हैं।

नई नीति के तहत जिन बल्क वेस्ट जनरेटरों ने अपने परिसर में गीले कचरे के प्रसंस्करण की व्यवस्था नहीं की है, उनके खिलाफ पर्यावरणीय मुआवजे तथा दंड के प्रावधानों के तहत भारी जुर्माना लगाने का प्रावधान किया गया है। साथ ही कचरा संग्रहण वाहनों की निगरानी के लिए व्हीकल ट्रैकिंग सिस्टम और कचरा संवेदनशील क्षेत्रों की डिजिटल मैपिंग की व्यवस्था लागू की गई है, जिससे पूरी प्रणाली पारदर्शी और नियंत्रित हो सके।

इस दूरगामी नीति को स्थानीय नगरसेवकों का भी समर्थन प्राप्त हुआ है। नगरसेवकों ने कहा है कि कचरे का सही वर्गीकरण न होने से सफाई कर्मचारियों के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा उत्पन्न होता था, जिसे अब इस नई व्यवस्था से काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकेगा। उन्होंने नागरिकों से अपील की है कि वे बीएमसी की ‘जीरो वेस्ट’ मुहिम में सक्रिय योगदान दें।

इसी क्रम में बीएमसी ने देवनार में 1000 टीपीडी क्षमता का बायो-सीएनजी प्लांट, 600 टीपीडी का वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट तथा कांजुरमार्ग में 500 टीपीडी का बायोमेथेनेशन प्रोजेक्ट शुरू करने की तैयारी पूरी कर ली है। इन परियोजनाओं के पूर्ण होने के बाद मुंबई को डंपिंग ग्राउंड पर निर्भरता से पूरी तरह मुक्ति मिलने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति होगी और शहर को ‘जीरो वेस्ट’ मॉडल की ओर ले जाने का मार्ग प्रशस्त होगा।

Pratahkal Bureau

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