मुंबई में लगातार बढ़ते तापमान और भीषण गर्मी का प्रचंड असर अब महानगर की अमूल्य वृक्ष संपदा पर स्पष्ट रूप से दिखने लगा है। तपती धूप के कारण पेड़ों के सूखने और उनके असंतुलित होकर गिरने के बढ़ते खतरे को देखते हुए बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) ने एक विशेष संरक्षण अभियान को युद्ध स्तर पर शुरू किया है। इस महत्वपूर्ण अभियान के अंतर्गत शहर के सार्वजनिक स्थानों, प्रमुख सड़कों के किनारे और विभिन्न उद्यानों में लगे पेड़ों को टैंकरों के माध्यम से पानी पिलाया जा रहा है। बीएमसी प्रशासन का यह ठोस मानना है कि यदि इस मौसम में पेड़ों की जड़ों को पर्याप्त नमी उपलब्ध नहीं कराई गई, तो वे भीतर से कमजोर होकर धराशायी हो सकते हैं।

इस गंभीर समस्या से निपटने के लिए बीएमसी रणनीति के तहत ऐसे पानी का उपयोग कर रही है जो मानवीय उपभोग या पीने योग्य तो नहीं है, परंतु पौधों के पोषण और सिंचाई के लिए पूरी तरह सुरक्षित तथा उपयुक्त है। बीएमसी के ठोस कचरा प्रबंधन विभाग ने सड़कों की व्यवस्थित सफाई के साथ-साथ पेड़ों को पानी देने की इस मुहिम को अब और तेज कर दिया है। विशेष रूप से 'जी-दक्षिण' विभाग के अंतर्गत आने वाले केशवराव खाड्ये मार्ग, सांताक्रुज़ और जुहू जैसे प्रमुख इलाकों में व्यापक स्वच्छता अभियान के समानांतर ही पेड़ों की सिंचाई का कार्य भी तत्परता से किया जा रहा है।

उद्यान विभाग के विशेषज्ञ इस दौरान निरंतर पेड़ों के स्वास्थ्य की सूक्ष्म निगरानी कर रहे हैं, ताकि भीषण गर्मी के प्रभाव से टहनियों के सूखने या उनके अचानक टूटने की अप्रिय घटनाओं पर पूर्ण विराम लगाया जा सके। बीएमसी के वरिष्ठ अधिकारियों ने तकनीकी पक्ष स्पष्ट करते हुए कहा कि समय पर उचित जल आपूर्ति सुनिश्चित होने से पेड़ों का आंतरिक जल प्रवाह सुचारू बना रहता है, जिससे उनकी जड़ों की जमीन पर पकड़ अत्यधिक मजबूत रहती है। प्रशासन के इस पर्यावरण-अनुकूल कदम की स्थानीय नगरसेवकों ने मुक्त कंठ से सराहना की है।

नगरसेवकों ने इस मुहिम को जन-आंदोलन बनाने के उद्देश्य से नागरिकों और हाउसिंग सोसायटियों से भी यह पुरजोर अपील की है कि वे अपने निजी परिसर के पेड़ों को बचाने के लिए स्वयं आगे आएं। बीएमसी द्वारा जारी सार्वजनिक अपील में कहा गया है कि निजी क्षेत्रों और सोसायटियों के भीतर स्थित वृक्षों के संरक्षण की जिम्मेदारी वहां के जागरूक नागरिक उठाएं, ताकि सामूहिक प्रयासों के समन्वय से मुंबई की हरियाली को अक्षुण्ण रखा जा सके। विशेषज्ञों के अनुसार, गर्मियों के इन कठिन दिनों में पेड़ों का संरक्षण केवल सरकारी दायित्व मात्र नहीं है, बल्कि यह एक अनिवार्य सामाजिक कर्तव्य भी है ताकि आगामी मानसून के आगमन तक हमारी प्रकृति पूर्णतः सुरक्षित रहे।

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