मानसून की दस्तक के साथ ही मुंबई की सड़कों पर उभरने वाले गड्ढे हर साल शहरवासियों के लिए एक बड़ी चुनौती बन जाते हैं। इस समस्या पर स्थायी प्रहार करने और नागरिकों को सुगम आवागमन प्रदान करने के उद्देश्य से मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) ने अब 'एक्शन मोड' अपना लिया है। अतिरिक्त महानगरपालिका आयुक्त अभिजीत बांगर ने रस्ते व यातायात विभाग के उच्चाधिकारियों के साथ एक उच्च-स्तरीय बैठक आयोजित कर स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि सड़कों पर गड्ढों से संबंधित प्रत्येक शिकायत का निवारण अधिकतम 24 घंटे की समय सीमा के भीतर सुनिश्चित किया जाए।

बीएमसी ने मुंबई को गड्ढा मुक्त करने के लिए एक व्यापक कंक्रीटीकरण अभियान को गति दी है। इस योजना के अंतर्गत शहर की लगभग 1700 किलोमीटर लंबी सड़कों का सीमेंट कंक्रीटीकरण कार्य सफलतापूर्वक पूर्ण किया जा चुका है। प्रशासन का मानना है कि इस पहल के फलस्वरूप चालू वर्ष में सड़कों पर गड्ढों की संख्या में उल्लेखनीय कमी आई है, जिससे न केवल जनता को राहत मिली है, बल्कि सड़कों की मरम्मत पर होने वाले सरकारी व्यय में भी भारी बचत दर्ज की गई है।

जमीनी स्तर पर निगरानी तंत्र को सुदृढ़ करने के लिए बीएमसी ने एक अभिनव रणनीति तैयार की है। शहर के सभी 227 वार्डों के लिए प्रत्येक क्षेत्र में एक उप-अभियंता नियुक्त किया गया है, जिन्हें प्रतिदिन मोटरसाइकिल पर सवार होकर अपने अधिकार क्षेत्र की सड़कों का प्रत्यक्ष निरीक्षण करने का दायित्व सौंपा गया है। ये अधिकारी नागरिकों की शिकायतों की प्रतीक्षा किए बिना स्वयं गड्ढों की पहचान करेंगे और मास्टिक कुकर तकनीक के वैज्ञानिक उपयोग से उन्हें प्रारंभिक चरण में ही भर देंगे। प्रशासन ने चेतावनी दी है कि यदि कोई सड़क 'दोष दायित्व अवधि' के अंतर्गत आती है, तो संबंधित ठेकेदार को स्वयं के व्यय पर त्वरित मरम्मत करनी होगी; ऐसा न करने पर ठेकेदार के विरुद्ध सख्त दंडात्मक कार्यवाही की जाएगी। साथ ही, पूर्वी व पश्चिमी द्रुतगति महामार्ग और ईस्टर्न फ्रीवे जैसे प्रमुख राजमार्गों की देखरेख पर भी विशेष ध्यान केंद्रित करने के निर्देश दिए गए हैं।

प्रौद्योगिकी का लाभ उठाते हुए, बीएमसी ने इस वर्ष 'MyBMC MARG' नामक एक एकीकृत डिजिटल शिकायत प्रणाली भी लॉन्च की है। इस ऐप के माध्यम से मुंबईकर अब गड्ढों की स्पष्ट तस्वीरें, सटीक लोकेशन और विस्तृत विवरण साझा कर सकते हैं, जिससे प्रशासनिक टीम को त्वरित कार्रवाई करने में सहायता मिलेगी। मुंबई महानगरपालिका की यह पहल शहर के सड़क ढांचे को सुरक्षित और सुगम बनाने की दिशा में एक निर्णायक कदम मानी जा रही है, जो आगामी मानसून सत्र में नागरिकों के लिए राहत का सबब बनेगी।

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