मुंबई महानगरपालिका की हालिया बैठक में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जारी टकराव थमता नजर नहीं आ रहा है। सदन में हुए हंगामे और विपक्ष के वॉकआउट के बाद सत्ता पक्ष की ओर से प्रमुख नेता गणेश खनकर ने विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए सदन की कार्यवाही को लेकर अपना पक्ष विस्तार से रखा। उन्होंने कहा कि जब शहर के विकास और नागरिकों की बुनियादी सुविधाओं से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषय चर्चा के लिए सूचीबद्ध थे, तब विपक्ष ने केवल हंगामा कर कार्यवाही में बाधा डालने का प्रयास किया। उनके अनुसार, विपक्ष के पास जनता से जुड़े मुद्दों पर चर्चा के लिए कोई ठोस एजेंडा नहीं था।

गणेश खनकर ने विपक्ष के रुख पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब धारावी बस डिपो और अन्य विकास प्रस्तावों पर सदन में महत्वपूर्ण चर्चा चल रही थी, तब शिवसेना (UBT) और कांग्रेस सहित पूरे विपक्ष ने सकारात्मक रूप से चर्चा में भाग क्यों नहीं लिया। उन्होंने बताया कि सदन के पटल पर प्रस्तुत रिपोर्ट को नियमों के अनुसार खारिज कर दिया गया। उनका कहना था कि ऐसे सभी महत्वपूर्ण प्रस्ताव पहले विशेष समितियों में गहन विचार-विमर्श के बाद मंजूर किए जाते हैं और उसके बाद ही अंतिम स्वीकृति के लिए मुख्य सदन के समक्ष लाए जाते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह पूरी तरह संवैधानिक और वैधानिक प्रक्रिया है तथा प्रक्रियागत अनियमितता को लेकर विपक्ष द्वारा लगाए जा रहे आरोप पूरी तरह निराधार और भ्रामक हैं।

चेंबूर हादसे के संवेदनशील मुद्दे पर सत्ता पक्ष का रुख स्पष्ट करते हुए गणेश खनकर ने कहा कि वे स्वयं इस मामले में प्रशासन के ढुलमुल रवैये के खिलाफ हैं। उन्होंने मांग की कि चेंबूर हादसे की पूरी रिपोर्ट की किसी निष्पक्ष तीसरे पक्ष से उच्च स्तरीय जांच कराई जानी चाहिए, ताकि पूरे मामले की वास्तविकता सामने आ सके। उन्होंने कहा कि सदन में विपक्ष चेंबूर मामले पर पॉइंट ऑफ ऑर्डर लाने की तैयारी में था, लेकिन सत्ता पक्ष भी इस मुद्दे पर पीछे नहीं था और प्रशासनिक लापरवाही के विरोध में उसने पहले ही अपनी सख्त भूमिका स्पष्ट कर दी थी।

गणेश खनकर ने विपक्ष के उस दावे को भी खारिज किया, जिसमें इस बैठक को केवल एक व्यावसायिक बैठक बताया जा रहा था। उन्होंने कहा कि सदन के एजेंडे में श्मशान भूमि की मरम्मत और सुधार जैसी जनहित से जुड़ी अत्यंत आवश्यक योजना भी शामिल थी, जिसे किसी भी दृष्टिकोण से निजी लाभ का प्रस्ताव नहीं कहा जा सकता। उन्होंने स्पष्ट किया कि सदन की कार्यवाही किस प्रकार और किस क्रम में संचालित होगी, इसका अंतिम निर्णय लेने का अधिकार केवल महापौर के पास होता है। उन्होंने कहा कि सत्ता पक्ष हर नियम का सम्मान करता है और शहर के विकास तथा जनता से जुड़े प्रत्येक मुद्दे पर सकारात्मक चर्चा के लिए पूरी तरह तैयार था। उनके अनुसार, विपक्ष का हंगामा केवल राजनीतिक उद्देश्य से किया गया कदम है, जिसका नुकसान अंततः मुंबई की जनता को उठाना पड़ रहा है।

Pratahkal Newsroom

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