मुंबई महानगरपालिका के तहत संचालित प्रसूति गृहों की स्वास्थ्य सुविधाओं को व्यापक बनाने की दिशा में बीएमसी सदन में एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव रखा गया। भारतीय जनता पार्टी की नगरसेविका प्रीति सातम ने ठराव की सूचना के माध्यम से मांग की कि बीएमसी के सभी प्रसूति गृहों का स्तर बढ़ाकर उन्हें पूर्ण रूप से 'माता एवं शिशु अस्पताल' में परिवर्तित किया जाए। इस प्रस्ताव पर संज्ञान लेते हुए महापौर रितु तावड़े ने बीएमसी प्रशासन को आगामी बैठक में इस विषय पर विस्तृत रिपोर्ट और अपना अभिप्राय प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।

सदन में अपनी बात रखते हुए प्रीति सातम ने बताया कि वर्तमान में बीएमसी के तहत लगभग 28 प्रसूति गृह संचालित हैं, जहां मुख्य रूप से केवल महिलाओं के प्रसव की सुविधा उपलब्ध है। उन्होंने कहा कि कई मामलों में जन्म के तुरंत बाद नवजात शिशुओं में बीमारी, जटिलता या विटामिन की कमी जैसी समस्याएं सामने आती हैं। ऐसी परिस्थितियों में प्रसूति गृहों में बाल रोग विशेषज्ञों और नवजात गहन चिकित्सा इकाई (एनआईसीयू) की सुविधा नहीं होने के कारण बच्चों को दूर स्थित अन्य बीएमसी अथवा निजी अस्पतालों में रेफर करना पड़ता है।

उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया से उपचार में देरी होती है, जिससे नवजात शिशुओं की जान पर जोखिम बढ़ जाता है। साथ ही अभिभावकों को मानसिक, शारीरिक और आर्थिक परेशानियों का भी सामना करना पड़ता है। इन समस्याओं के स्थायी समाधान के लिए उन्होंने सुझाव दिया कि प्रसूति गृहों और बाल चिकित्सा केंद्रों को एक ही परिसर में एकीकृत किया जाए।

प्रीति सातम ने प्रस्ताव में कहा कि इन केंद्रों पर माताओं की देखभाल के साथ नवजात और छोटे बच्चों के उपचार के लिए बाल रोग विशेषज्ञ, एनआईसीयू, टीकाकरण, पोषण परामर्श सहित सभी आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाएं एक ही छत के नीचे उपलब्ध कराई जानी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि यदि बीएमसी इन प्रसूति गृहों में पर्याप्त मैनपावर, चिकित्सा उपकरण और आवश्यक आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध कराती है तो आम नागरिकों को बड़ी राहत मिलेगी और माताओं को इलाज के लिए अलग-अलग अस्पतालों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।

सदन में इस प्रस्ताव का विभिन्न दलों के पार्षदों ने समर्थन किया। डॉ. शिल्पा सांगारे, जागृती पाटिल, स्वप्ना म्हात्रे, विशाखा राऊत, शीतल गंभीर, किशोरी पेडणेकर, हरिश भांदिर्गे और सदन के नेता गणेश खनकर ने चर्चा में भाग लेते हुए प्रस्ताव का स्वागत किया तथा कई महत्वपूर्ण सुझाव भी दिए।

सभी सदस्यों की राय सुनने के बाद महापौर रितु तावड़े ने प्रशासन को निर्देश दिया कि इस प्रस्ताव के सभी पहलुओं का परीक्षण कर आगामी बैठक में विस्तृत रिपोर्ट और अपना अभिप्राय सदन के समक्ष प्रस्तुत किया जाए। इससे बीएमसी के प्रसूति गृहों को 'माता एवं शिशु अस्पताल' के रूप में विकसित करने की दिशा में आगे की प्रक्रिया तय होगी।

Pratahkal Bureau

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