बीएमसी की 20% बेकार जमीनों पर बनेेंगे 20 बिजनेस हब, नीति आयोग तैयार करेगा विकास योजना
बीएमसी की 12.8 वर्ग किलोमीटर अनुपयोगी जमीनों पर 20 बिजनेस हब बनाने की तैयारी, नीति आयोग तैयार करेगा विकास और निवेश योजना।

मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) की अनुपयोगी पड़ी भू-संपत्तियों की तस्वीर अब बदलने की तैयारी शुरू हो गई है। जिन जमीनों को विकसित करने के लिए टेंडर जारी किए गए थे, लेकिन बिल्डर और डेवलपर आगे नहीं आए, उनका भविष्य अब केंद्रीय नीति आयोग तय करने जा रहा है। नीति आयोग का विशेष दल जल्द ही मुंबई का दौरा कर इन भूखंडों के बेहतर उपयोग और व्यावसायिक विकास की योजना तैयार करेगा।
410 वर्ग किलोमीटर में फैली मुंबई नगरी में करीब 64 वर्ग किलोमीटर जमीन बीएमसी के स्वामित्व में है। बीएमसी की कुल भूमि में से लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा, यानी करीब 12.8 वर्ग किलोमीटर भूखंड वर्तमान में अनुपयोगी पड़ा हुआ है। प्रशासन अब इन जमीनों को विकसित कर आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने की दिशा में काम कर रहा है।
बीएमसी के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, ये अप्रयुक्त और खाली भूखंड मुख्य रूप से एम-पूर्व विभाग मानखुर्द, एन-विभाग घाटकोपर, जी-दक्षिण विभाग वर्ली और एफ-दक्षिण विभाग परेल जैसे प्रमुख इलाकों में स्थित हैं। इसके अलावा जल विभाग और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन विभाग के पास भी कई स्थानों पर महत्वपूर्ण भू-संपत्तियां मौजूद हैं।
प्रशासन इन संपत्तियों के रखरखाव, मरम्मत, ब्याज और इनसे प्राप्त होने वाले किराए का विस्तृत हिसाब तैयार कर रहा है। बीएमसी की योजना अपनी सभी संपत्तियों का डिजिटल कार्ड तैयार कर उन्हें एकीकृत सिस्टम से जोड़ने की है। इससे संपत्तियों की सही जानकारी उपलब्ध होगी और बार-बार रखरखाव के नाम पर होने वाली कमीशनखोरी पर नियंत्रण लगाया जा सकेगा। साथ ही इन जमीनों का बाजार मूल्य भी तय किया जा सकेगा।
नीति आयोग के मार्गदर्शन में बीएमसी पूरी मुंबई का एक व्यापक आर्थिक सर्वेक्षण भी करवा रही है। यह सर्वेक्षण इस वर्ष के अंत तक पूरा होने की उम्मीद है। इसका मुख्य उद्देश्य मुंबई में 20 नए बिजनेस हब तैयार करना है।
राज्य सरकार द्वारा स्थानीय निकायों के लिए संपत्ति मुद्रीकरण नीति को मंजूरी दिए जाने के बाद, बीएमसी अपनी 20 प्रतिशत अनुपयोगी जमीनों को पीपीपी मॉडल पर विकसित करने की तैयारी कर रही है। इसके लिए विदेशी निवेशकों को भी आकर्षित करने की योजना बनाई जा रही है।
इस पहल के जरिए बीएमसी को अपनी भू-संपत्तियों से बड़ा राजस्व मिलने की उम्मीद है। साथ ही मुंबई में नए व्यावसायिक केंद्र विकसित होने से रोजगार के अवसर भी बढ़ाने की दिशा में यह कदम महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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