बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) में रिक्त पड़े जूनियर इंजीनियरों के पदों को भरने की प्रतीक्षित प्रक्रिया अब अपने अंतिम चरण में पहुँचने वाली है। बीएमसी की विधि समिति की अध्यक्ष दीक्षा हर्षद कारकर ने कल विधि विभाग के अधिकारियों के साथ एक उच्चस्तरीय महत्वपूर्ण बैठक की, जिसमें उन्होंने लंबे समय से लंबित कानूनी मामलों की गहन समीक्षा की। बैठक के दौरान कारकर ने विभाग को दोटूक शब्दों में स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि नगर निगम से जुड़े सभी अदालती मामलों में बीएमसी का पक्ष पूरी मजबूती और तथ्यों के साथ रखा जाए। विशेष रूप से पिछले वर्ष आरंभ की गई जूनियर इंजीनियरों की भर्ती प्रक्रिया को अविलंब पूर्ण करने के लिए मार्ग में आ रही तमाम कानूनी अड़चनों को प्राथमिकता के आधार पर सुलझाने पर बल दिया गया है।

अध्यक्ष दीक्षा कारकर ने स्थिति की गंभीरता को रेखांकित करते हुए कहा कि वर्तमान में मुंबई महानगर के भीतर विकास कार्य और बुनियादी ढांचे के प्रोजेक्ट अभूतपूर्व स्तर पर संचालित हो रहे हैं। ऐसे में इंजीनियरों के पद रिक्त होने के कारण कार्यरत कर्मचारियों पर कार्य का अतिरिक्त बोझ निरंतर बढ़ रहा है, जिसका सीधा और प्रतिकूल प्रभाव नागरिक सेवाओं की गुणवत्ता पर पड़ रहा है। गौरतलब है कि जूनियर इंजीनियर पदों की शैक्षणिक योग्यता को लेकर कुछ उम्मीदवारों द्वारा दर्ज कराई गई आपत्तियों के कारण यह पूरा मामला फिलहाल न्यायालय के विचाराधीन है। अध्यक्ष ने विधि विभाग को निर्देशित किया है कि वे अदालत में बीएमसी की भूमिका और पक्ष को इतने प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करें जिससे इस कानूनी विवाद का शीघ्र अति शीघ्र निपटारा संभव हो सके। उन्होंने पूर्ण विश्वास व्यक्त किया कि जैसे ही यह भर्ती प्रक्रिया पूर्ण होगी, शहर की नागरिक सुविधाएं और भी अधिक सुदृढ़, सुव्यवस्थित और बेहतर होंगी।

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