बीएमसी की कार्यप्रणाली और योजनाओं को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। बीएमसी की सुधार समिति की बैठक के दौरान कांग्रेस नेता अशरफ आजमी ने प्रशासन की नीतियों का जोरदार विरोध करते हुए जोगेश्वरी पूर्व की लगभग 1,800 वर्ग मीटर जमीन का मुद्दा उठाया। यह जमीन पहले से ही बेघर और प्रभावित लोगों के पुनर्वास के लिए आरक्षित थी, लेकिन प्रशासन अब इसके आरक्षण को समाप्त कर इसे सामान्य आवासीय क्षेत्र में बदलने का प्रयास कर रहा है।

अशरफ आजमी ने इस प्रस्ताव का कड़ा विरोध करते हुए बीएमसी की योजना पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि एक तरफ नगर निगम परियोजनाओं से प्रभावित लोगों के घर बनाने के लिए 20,000 करोड़ रुपये से अधिक की भारी-भरकम राशि खर्च करने का दावा कर रहा है, जबकि दूसरी तरफ पुनर्वास के लिए पहले से तय और सुरक्षित जमीनों के आरक्षण को धीरे-धीरे खत्म किया जा रहा है।

उन्होंने इसे बीएमसी की नीतियों में बड़ा विरोधाभास बताया। उनके मुताबिक, मुंबई जैसे बड़े शहर में विस्थापित लोगों को दोबारा बसाने के लिए पहले से कहीं अधिक जमीन और मकानों की सख्त जरूरत है। ऐसे में पुनर्वास के लिए आरक्षित जमीन के उपयोग में बदलाव को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।

अशरफ आजमी ने कहा कि अगर डेवलपमेंट प्लान 2034 में तय किए गए नियमों और जमीनों के इस्तेमाल को बार-बार इसी तरह बदला जाता रहेगा, तो शहर के विकास नियोजन का कोई महत्व नहीं रह जाएगा। उन्होंने मुंबई में खेल के मैदानों, खुले पार्कों और सार्वजनिक जमीनों के उपयोग में लगातार हो रहे बदलावों का मुद्दा भी उठाया और कहा कि इससे आम जनता के हितों को नुकसान पहुंच रहा है।

इस संबंध में मुंबई के महापौर और नगरपालिका आयुक्त को पत्र लिखकर जोगेश्वरी पूर्व की इस जमीन से जुड़े प्रस्ताव को तुरंत रद्द करने तथा शहर की कीमती जमीनों की रक्षा करने की मांग की गई है। अब यह मामला बीएमसी की पुनर्वास नीति, आरक्षित जमीनों के संरक्षण और डेवलपमेंट प्लान 2034 के तहत तय भूमि उपयोग को लेकर उठे सवालों के केंद्र में है।

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