मुंबई में बोरिवली पूर्व स्थित बेस्ट बस डिपो की जमीन से अवैध निर्माण हटाने में लापरवाही बरतने का मामला अब बीएमसी के वरिष्ठ अधिकारियों पर भारी पड़ने लगा है। सर्वोच्च न्यायालय की सख्ती और बीएमसी आयुक्त अश्विनी भिड़े का वेतन रोकने तथा अवमानना नोटिस जारी करने के निर्देश के बाद महानगरपालिका प्रशासन में हड़कंप मच गया है। अदालत की नाराजगी के बाद अब इस मामले में जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

बीएमसी प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 'आर मध्य' वार्ड के सहायक आयुक्त डॉ. प्रफुल्ल तांबे और महानगरपालिका के कानून विभाग की अधिकारी कोमल पंजाबी को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। दोनों अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा गया है कि सर्वोच्च न्यायालय के बार-बार निर्देश देने के बावजूद समय पर तोड़क कार्रवाई क्यों नहीं की गई।

मामले के अनुसार, बोरिवली पूर्व में 'बेस्ट' बस डिपो की जमीन पर बने 27 अवैध निर्माणों को हटाने के लिए सर्वोच्च न्यायालय ने कई बार निर्देश दिए थे। इसके बावजूद अधिकारियों की लापरवाही के चलते कार्रवाई लगातार टलती रही। इस देरी पर कड़ा रुख अपनाते हुए 3 नवंबर 2026 को सर्वोच्च न्यायालय ने बीएमसी पर 5 लाख रुपये का जुर्माना लगाने के साथ आयुक्त का वेतन रोकने के सख्त निर्देश दिए थे। अदालत ने अवमानना नोटिस भी जारी किया था।

सर्वोच्च न्यायालय के इस फैसले के बाद बीएमसी की स्थायी समिति की बैठक में भी मामला गरमा गया। विभिन्न राजनीतिक दलों के नगरसेवकों और नेताओं ने जमकर हंगामा करते हुए लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग उठाई। साथ ही संबंधित अधिकारियों के खिलाफ निलंबन और विभागीय जांच की मांग भी की गई।

इसी बीच सामाजिक कार्यकर्ता संतोष दौंडकर ने बीएमसी आयुक्त को लिखित शिकायत देकर कानून विभाग की कार्यशैली और अदालती मामलों में कमजोर पैरवी पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कानून विभाग के अधिकारियों का कमजोर कानूनी ज्ञान, लगातार होने वाले तबादले और वकीलों को सही जानकारी नहीं दिए जाने के कारण बीएमसी को अदालतों में बार-बार फजीहत का सामना करना पड़ता है।

दौंडकर ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए एक स्वतंत्र समिति गठित करने की मांग की है। उनका आरोप है कि कानून विभाग की कार्यप्रणाली में खामियों का असर अदालती मामलों में महानगरपालिका के पक्ष पर पड़ रहा है।

सर्वोच्च न्यायालय की सख्ती के बाद बीएमसी प्रशासन ने अब दो वरिष्ठ अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाबदेही तय करने की दिशा में कदम उठाया है। 27 अवैध निर्माणों पर कार्रवाई में हुई देरी से शुरू हुआ यह विवाद अब महानगरपालिका के प्रशासनिक और कानूनी विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर रहा है।

Pratahkal Bureau

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