BMC और IIM मुंबई के बीच समझौता, शहरी प्रशासन को डेटा-आधारित बनाने की पहल
बृहन्मुंबई महानगरपालिका और भारतीय प्रबंधन संस्थान मुंबई के बीच हुए इस समझौते के तहत शहर में बाढ़ नियंत्रण, ठोस कचरा प्रबंधन और डिजिटल गवर्नेंस को मजबूत किया जाएगा।

मुंबई में प्रशासनिक और पर्यावरणीय सुधारों के बीच सोमवार, 25 मई 2026 को जल निकासी और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं का निरीक्षण करते अधिकारी।
देश की आर्थिक राजधानी मुंबई जैसे तीव्र गति से विकसित हो रहे वैश्विक महानगर की जटिल नागरिक एवं प्रशासनिक चुनौतियों के वैज्ञानिक समाधान की दिशा में सोमवार, 25 मई 2026 को एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया। बृहन्मुंबई महानगरपालिका और देश के प्रतिष्ठित प्रबंधन संस्थान भारतीय प्रबंधन संस्थान मुंबई के बीच शहरी प्रशासन, डेटा एनालिसिस, नीतिगत अनुसंधान एवं क्षमता विकास के क्षेत्र में ऐतिहासिक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए।
यह समझौता बृहन्मुंबई महानगरपालिका मुख्यालय में आयोजित विशेष कार्यक्रम के दौरान संपन्न हुआ, जिसमें महानगरपालिका आयुक्त श्रीमती अश्विनी भिडे और मनोज कुमार तिवारी ने आधिकारिक रूप से हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर अतिरिक्त आयुक्त डॉ. अश्विनी जोशी, अभिजीत बांगर तथा डॉ. अविनाश ढाकणे सहित बीएमसी के अनेक वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
इस दूरगामी समझौते के तहत भारतीय प्रबंधन संस्थान मुंबई अपने शैक्षणिक ज्ञान, डेटा एनालिटिक्स तथा सार्वजनिक नीति के अनुभवों का उपयोग बृहन्मुंबई महानगरपालिका के प्रशासनिक कार्यों को अधिक सक्षम और पेपरलेस बनाने में करेगा। दोनों संस्थाएं मिलकर मुंबई की वित्तीय व्यवस्था, बुनियादी ढांचा नियोजन एवं सार्वजनिक प्रशासन पर संयुक्त अध्ययन करेंगी, जिससे शहर के विकास हेतु नीतिगत मार्गदर्शक रिपोर्ट तैयार की जाएगी।
समझौते के अंतर्गत बीएमसी अधिकारियों एवं इंजीनियरों को आधुनिक शहरी प्रबंधन, ‘पीएम गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान’ के अनुरूप भू-स्थानिक नियोजन, पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) प्रशासन तथा जोखिम प्रबंधन जैसे अत्याधुनिक विषयों पर विशेष प्रशिक्षण भी प्रदान किया जाएगा। इसका उद्देश्य नागरिक सेवाओं की कार्यक्षमता को बढ़ाना है।
यह पहल केवल प्रशासनिक सुधार तक सीमित नहीं रहेगी। इसके अंतर्गत मुंबई में बाढ़ नियंत्रण, जलवायु परिवर्तन, कार्बन उत्सर्जन में कमी तथा ठोस कचरा प्रबंधन जैसे संवेदनशील पर्यावरणीय मुद्दों पर जमीनी स्तर पर संयुक्त परियोजनाएं भी चलाई जाएंगी। साथ ही शहर में गतिशीलता और डिजिटल गवर्नेंस को बढ़ावा देने के लिए ‘बृहन्मुंबई महानगरपालिका और आईआईएम मुंबई अर्बन इनोवेशन सेंटर ऑफ एक्सलेंस’ की स्थापना की जाएगी।
इस समझौते का स्थानीय नगरसेवकों ने भी स्वागत किया है। उनका मानना है कि इस वैज्ञानिक और आधुनिक दृष्टिकोण से वार्ड स्तर पर कचरा प्रबंधन एवं जल संकट जैसी दैनिक समस्याओं का प्रभावी समाधान संभव होगा।
अश्विनी भिडे ने विश्वास व्यक्त किया कि शैक्षणिक उत्कृष्टता और नागरिक प्रशासन के इस संयुक्त मॉडल से न केवल मुंबई, बल्कि देश के अन्य शहरी निकायों के लिए भी एक आदर्श उदाहरण स्थापित होगा।
यह समझौता मुंबई के शहरी विकास, डिजिटल प्रशासन और पर्यावरणीय प्रबंधन की दिशा में एक निर्णायक कदम माना जा रहा है, जो भविष्य में महानगर की प्रशासनिक संरचना को अधिक आधुनिक, पारदर्शी और डेटा-आधारित बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

Pratahkal Bureau
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