बीएमसी अस्पताल सफाई टेंडर विवाद: नगरसेवकों ने प्रस्ताव लौटाया
मकरंद नार्वेकर और अन्य नगरसेवकों ने सीवीसी नियमों के उल्लंघन और तकनीकी खामियों का हवाला देते हुए 101 करोड़ रुपये के सफाई प्रस्ताव को पुनर्विचार के लिए भेजा।

बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) की हालिया बैठक उस वक्त हंगामे की भेंट चढ़ गई जब अस्पतालों की साफ-सफाई के ठेके को लेकर प्रशासन और नगरसेवकों के बीच ठन गई। नगरसेवकों ने प्रशासन द्वारा पेश किए गए सफाई प्रस्ताव पर गंभीर आपत्तियां दर्ज कराते हुए पारदर्शिता के अभाव में इसे सिरे से खारिज कर दिया। भारतीय जनता पार्टी के नगरसेवक मकरंद नार्वेकर ने इस निविदा प्रक्रिया को नियमों के विरुद्ध करार देते हुए सदन में इसे 'रिफर बैक' यानी दोबारा विचार के लिए भेजने की पुरजोर मांग की। नार्वेकर ने सीधा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि इस टेंडर प्रक्रिया में केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) के दिशा-निर्देशों का सरेआम उल्लंघन किया गया है। उन्होंने तकनीकी खामियों को उजागर करते हुए बताया कि निविदा प्रक्रिया में महज दो निविदाकार शामिल हुए थे, जिनमें से एक को तकनीकी आधार पर अयोग्य घोषित कर बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। इसके चलते मैदान में केवल एक ही ठेकेदार शेष बचा, जिससे न केवल स्वस्थ प्रतिस्पर्धा समाप्त हो गई बल्कि भ्रष्टाचार की आशंकाओं को भी बल मिला।
सदन में इस विरोध की गूंज तब और तेज हो गई जब नगरसेवक भांडिर्गे और कुरैशी ने मकरंद नार्वेकर के प्रस्ताव का समर्थन किया। इस दौरान कुरैशी ने एक सनसनीखेज खुलासा करते हुए सदन को अवगत कराया कि संबंधित ठेकेदार वही है, जिसने पूर्व में आठ अस्पतालों की सफाई हेतु 101 करोड़ रुपये का ठेका प्राप्त किया था, जिसे बाद में भारी अनियमितताओं के चलते रद्द करना पड़ा था। नगरसेवकों ने दो टूक शब्दों में स्पष्ट किया कि बीएमसी के भीतर अब केवल उन्हीं ठेकेदारों को प्रवेश मिलना चाहिए जो शहर की स्वच्छता और नागरिकों के स्वास्थ्य के प्रति पूर्णतः ईमानदार हों। सदन के नेता गणेश खणकर ने भी कड़ा रुख अपनाते हुए प्रशासन को आड़े हाथों लिया और कहा कि ऐसे प्रस्ताव लाते समय गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। नगरसेविका प्रीति साटम सहित अन्य सदस्यों के कड़े तेवरों को देखते हुए अंततः सदन ने इस विवादित प्रस्ताव को पुनर्विचार के लिए वापस भेजने का ऐतिहासिक निर्णय लिया। नगरसेवकों का स्पष्ट मत था कि पुरानी और विवादित कंपनियां नए स्वरूप में बीएमसी के खजाने पर डाका डालने का प्रयास कर रही हैं, जिसे किसी भी कीमत पर सफल नहीं होने दिया जाएगा। इस घटनाक्रम ने बीएमसी की टेंडर प्रक्रिया में व्यापक सुधार की आवश्यकता को पुन: रेखांकित किया है, जिससे अब प्रशासन को नए सिरे से और अधिक पारदर्शी तरीके से निविदाएं आमंत्रित करनी होंगी ताकि जनता के धन का सदुपयोग और अस्पतालों की व्यवस्था सुदृढ़ हो सके।

Pratahkal Bureau
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