BMC मुख्यालय में 30 सीसीटीवी बंद, 87 AI कैमरे लगाने को मंजूरी
मुंबई बीएमसी मुख्यालय में सुरक्षा चूक पर विवाद के बाद प्रशासन लगा रहा 3.45 करोड़ रुपये के नए एआई कैमरे।

मुंबई। बीएमसी की ऐतिहासिक मुख्य इमारत की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर लापरवाही सामने आई है। बीएमसी प्रशासन ने खुद माना है कि मुख्य इमारत में लगे कुल 56 सीसीटीवी कैमरों में से 30 कैमरे काफी समय से बंद पड़े हैं। सुरक्षा व्यवस्था में इस चूक को लेकर स्थायी समिति की बैठक में सभी राजनीतिक दलों के नेताओं ने प्रशासन को घेरा और नाराजगी जताई।
बैठक में सदस्यों ने सवाल उठाया कि बीएमसी की मुख्य इमारत में रोजाना हजारों लोगों और बड़े अधिकारियों का आना-जाना रहता है, इसके बावजूद इतने लंबे समय से बंद पड़े कैमरों पर ध्यान क्यों नहीं दिया गया। नेताओं ने सुरक्षा व्यवस्था में हुई इस चूक पर प्रशासन से जवाब मांगा।
बीजेपी नेताओं ने नए सीसीटीवी कैमरों की कीमतों को लेकर भी सवाल उठाए। उनका आरोप था कि नए कैमरों की कीमतें बहुत अधिक दिखाई गई हैं और इसकी जांच की जानी चाहिए। वहीं, कुछ नेताओं ने सुझाव दिया कि नए कैमरों की वीडियो रिकॉर्डिंग का डेटा कम से कम छह महीने या एक साल तक सुरक्षित रखा जाना चाहिए, ताकि जरूरत पड़ने पर पुरानी जानकारी आसानी से निकाली जा सके।
तमाम बहस और आपत्तियों के बीच अतिरिक्त आयुक्त बिपिन शर्मा ने प्रशासन की ओर से सफाई दी। उन्होंने बताया कि बंद पड़े कैमरों की जगह अब अधिक आधुनिक एआई तकनीक वाले कैमरे लगाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यालय की सुरक्षा मजबूत करने के लिए 87 नए एआई कैमरे लगाना जरूरी है।
विरोधियों की आपत्तियों के बावजूद 3.45 करोड़ रुपये के नए सुरक्षा प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई। नए ठेके के तहत एआई तकनीक वाले कैमरे महापौर और आयुक्त कार्यालय, मुख्य हॉल, स्थायी समिति हॉल, सभी दरवाजों और रास्तों पर लगाए जाएंगे।
इस पूरे काम को पूरा करने के लिए नौ महीने का समय तय किया गया है। 30 मौजूदा सीसीटीवी कैमरों के लंबे समय से बंद होने के खुलासे के बाद बीएमसी मुख्यालय की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर उठे सवालों के बीच अब 87 नए एआई कैमरों की स्थापना पर निगाह रहेगी।

Naresh Ameta (Mumbai)
नरेश अमेटा (मुंबई), प्रात:काल समाचार वेबसाइट के अनुभवी संवाददाता हैं। मुंबई से कार्यरत नरेश जी समाचार की सटीकता और निष्पक्षता के लिए जाने जाते हैं। वे प्रमुख राष्ट्रीय और स्थानीय खबरों की रिपोर्टिंग करते हैं और अपने विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण से पाठकों को घटनाओं की गहरी समझ प्रदान करते हैं। नरेश जी की लेखनी में तथ्यपरक जानकारी के साथ-साथ घटनाओं की ताज़ा और भरोसेमंद प्रस्तुति देखने को मिलती है, जो प्रात:काल के पाठकों के लिए समाचार अनुभव को और समृद्ध बनाती है।
