मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) के विकास कार्यों के लिए आवंटित बजट को लेकर छिड़ा राजनीतिक घमासान अब चरम पर पहुंच गया है। मुंबई कांग्रेस अध्यक्ष एवं सांसद वर्षा गायकवाड ने सत्तारूढ़ भाजपा-शिंदे गठबंधन पर तीखा हमला बोलते हुए इस आवंटन प्रक्रिया को 'लोकतंत्र की हत्या' करार दिया है। गायकवाड का स्पष्ट आरोप है कि जब से बीएमसी का बजट जारी हुआ है, तब से विपक्षी पार्षदों के साथ निरंतर सौतेला व्यवहार किया जा रहा है। उन्होंने कड़े शब्दों में चेतावनी दी कि विकास निधि का पैसा किसी विशेष राजनीतिक दल की निजी बपौती नहीं है, बल्कि यह मुंबई के मेहनतकश करदाताओं की गाढ़ी कमाई का हिस्सा है, जिसे शहर के हर वार्ड में समान रूप से वितरित किया जाना अनिवार्य है।

सांसद वर्षा गायकवाड ने आंकड़ों का हवाला देते हुए इस वित्तीय असमानता की पोल खोली। उन्होंने बताया कि स्थायी समिति के 800 करोड़ रुपये के कुल कोष में से सत्ताधारी दल के पार्षदों पर करोड़ों की 'खैरात' बांटी जा रही है। उनके अनुसार, भाजपा के वरिष्ठ नेताओं को जहां 10 से 20 करोड़ रुपये तक आवंटित किए गए हैं और उनके प्रत्येक पार्षद के खाते में सवा दो करोड़ रुपये की राशि आई है, वहीं कांग्रेस के पार्षदों को महज 25 लाख रुपये देकर चुप कराने का प्रयास किया गया है। गायकवाड ने यह गंभीर सवाल भी उठाया कि जब समाजवादी पार्टी और अन्य विपक्षी दलों को अपेक्षाकृत अधिक निधि प्रदान की जा रही है, तो विशेष रूप से कांग्रेस के साथ ही ऐसा भेदभावपूर्ण व्यवहार क्यों किया जा रहा है? उन्होंने हुंकार भरते हुए कहा कि विकास निधि में यह पक्षपात किसी भी कीमत पर सहन नहीं किया जाएगा। यदि अविलंब सभी वार्डों को समान वित्तीय अधिकार सुनिश्चित नहीं किए गए, तो कांग्रेस पार्टी मुंबईकरों के हक के लिए सड़क पर उतरकर उग्र आंदोलन छेड़ने को बाध्य होगी। यह विवाद अब बीएमसी के भीतर सत्ता और विपक्ष के बीच एक बड़े शक्ति संघर्ष का रूप ले चुका है, जिसका सीधा असर मुंबई के बुनियादी विकास कार्यों पर पड़ना तय है।

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