बीएमसी ई वॉर्ड में विज़न एआई वॉल्ट शुरू, जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र अब तुरंत मिलेंगे
अतिरिक्त आयुक्त डॉ. अश्विनी जोशी की पहल पर शुरू हुई तकनीक से दशकों पुराने हस्तलिखित रिकॉर्ड्स का डिजिटलीकरण होगा और दस्तावेजों के लिए लंबा इंतजार खत्म होगा।

मुंबई महानगरपालिका के 'ई' प्रशासकीय विभाग ने डिजिटल क्रांति की दिशा में एक युगांतरकारी कदम उठाते हुए प्रशासनिक कार्यप्रणाली की तस्वीर बदल दी है। अब मुंबई के नागरिकों को जन्म-मृत्यु और विवाह पंजीकरण जैसे अनिवार्य दस्तावेजों की प्राप्ति के लिए हफ्तों या महीनों तक प्रतीक्षा नहीं करनी होगी। अतिरिक्त महानगरपालिका आयुक्त डॉ. अश्विनी जोशी की दूरदर्शी पहल पर 'विज़न एआई वॉल्ट' नामक अत्याधुनिक प्रणाली का शुभारंभ किया जा रहा है। यह तकनीक दशकों पुराने हस्तलिखित अभिलेखों को न केवल भविष्य के लिए सुरक्षित करेगी, बल्कि उन्हें डिजिटल स्वरूप में महज़ कुछ सेकंड के भीतर उपलब्ध कराने में सक्षम है। डॉ. अश्विनी जोशी के अनुसार, जिस दस्तावेजी प्रक्रिया को पूर्ण होने में पहले 30 दिनों से लेकर डेढ़ साल तक का लंबा समय लग जाता था, वह सेवा अब नागरिकों को उंगलियों के इशारे पर प्राप्त होगी।
उल्लेखनीय है कि 'ई' वॉर्ड के अभिलेखागार में कई ऐतिहासिक और अमूल्य दस्तावेज वर्षों से धूल और नमी के प्रभाव के कारण जर्जर अवस्था में थे। पुरानी स्याही के फीके पड़ने और पन्नों के अत्यंत नाजुक होने के कारण वांछित रिकॉर्ड खोजना प्रशासन के लिए एक अत्यंत जटिल चुनौती बन चुका था। यह नवोन्मेषी एआई आधारित तकनीक सामान्य स्कैनिंग की सीमाओं से कहीं आगे है; यह प्रणाली पुरानी अंग्रेजी, हिंदी और मराठी की घुमावदार लिखावट को अचूक सटीकता के साथ पढ़ने और फीके पड़ चुके अक्षरों को स्पष्ट करने की अद्भुत क्षमता रखती है। इस डिजिटल परिवर्तन से न केवल प्रशासनिक कार्यक्षमता में व्यापक वृद्धि होगी, बल्कि फर्जी दस्तावेजों के निर्माण पर भी पूरी तरह लगाम लगेगी।
प्रशासन के इस आधुनिक एवं पारदर्शी कदम का स्थानीय नगरसेवकों ने पुरजोर स्वागत करते हुए इसे जनहितकारी बताया है। जनप्रतिनिधियों का मत है कि इस तकनीक के क्रियान्वयन से आम जनता को बीएमसी कार्यालयों के अंतहीन चक्करों से मुक्ति मिलेगी और भ्रष्टाचार पर प्रभावी अंकुश लगेगा। बीएमसी आयुक्त अश्विनी भिडे के दिशा-निर्देशानुसार संचालित यह प्रोजेक्ट भारत की किसी भी महानगरपालिका द्वारा उठाया गया अपनी तरह का पहला नागरिक-केंद्रित अनुकरणीय कदम है। इस प्रणाली के तहत जैसे ही नागरिक अपना नाम टाइप करेंगे, एआई तकनीक तत्काल संबंधित रिकॉर्ड को ढूंढकर स्क्रीन पर प्रदर्शित कर देगी और डिजिटल हस्ताक्षर युक्त प्रमाण पत्र क्षण भर में बनकर तैयार हो जाएगा। उपायुक्त चंदा जाधव और सहायक आयुक्त आनंद कंकाल के कुशल नेतृत्व में यह प्रोजेक्ट सफलतापूर्वक लागू किया जा रहा है, जो भविष्य में सुशासन का एक नया मानक स्थापित करेगा।

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