पर्यावरण अनुकूल गणेशोत्सव के लिए बीएमसी की बड़ी तैयारी: मूर्तिकारों को मुफ्त मिलेगा इको-फ्रेंडली रंग
मुंबई में गणेशोत्सव 2026 को पर्यावरण के अनुकूल बनाने के लिए बीएमसी ने एक बड़ा कदम उठाया है। इस बार मूर्तिकारों को 25,400 लीटर मुफ्त इको-फ्रेंडली रंग बांटे जाएंगे। आखिर कैसे सुरक्षित होगा विसर्जन और किसे मिला यह टेंडर? पढ़ें पूरी खबर।

मुंबई के सबसे बड़े और पसंदीदा त्योहार 'गणेशोत्सव 2026' को पूरी तरह पर्यावरण के अनुकूल बनाने की दिशा में बृहन्मुंबई महानगरपालिका ने एक बड़ा और सराहनीय कदम उठाया है। बीएमसी के पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन विभाग ने निर्णय लिया है कि इस वर्ष मुंबई के मूर्तिकारों को 25,400 लीटर इको-फ्रेंडली रंगों की मुफ्त आपूर्ति की जाएगी। इस महत्वपूर्ण परियोजना के वितरण, परिवहन और वार्ड स्तर पर प्रबंधन के लिए बीएमसी की स्थायी समिति की बैठक में 'मेसर्स एकता एंटरप्राइजेज' के टेंडर को आधिकारिक मंजूरी दे दी गई है। इस पूरी योजना पर 18 प्रतिशत वस्तु एवं सेवा कर सहित कुल 1,04,65,659.77 रुपये का व्यय किया जाएगा।
बीएमसी के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, गणेश जी की प्रतिमाएं आमतौर पर शाडू मिट्टी, कागज, धातु और प्लास्टर ऑफ पेरिस से बनाई जाती हैं। हालांकि, मूर्तियों को आकर्षक रूप देने के लिए उपयोग किए जाने वाले रासायनिक रंगों में लेड, कैडमियम, क्रोमियम और मरकरी जैसी बेहद खतरनाक भारी धातुएं शामिल होती हैं। इन मूर्तियों के विसर्जन से रसायन पानी में घुलकर समुद्री जीव-जंतुओं और जलीय पर्यावरण के लिए जानलेवा साबित होते हैं। इस गंभीर समस्या को देखते हुए बीएमसी ने पिछले साल गणेशोत्सव 2025 में भी मूर्तिकारों को 10,800 लीटर पर्यावरण अनुकूल रंगों का मुफ्त वितरण किया था, जिसे इस बार त्योहार की व्यापकता को देखते हुए बढ़ाकर 25,400 लीटर कर दिया गया है।
इस कार्य को तय समय सीमा में पूरा करने के लिए बीएमसी ने जेम पोर्टल और समाचार पत्रों में विज्ञापन देकर ई-निविदाएं आमंत्रित की थीं। इस प्रक्रिया में 'मेसर्स एकता एंटरप्राइजेज', 'मेसर्स हरी एंटरप्राइजेज' और 'मेसर्स जीएस कंस्ट्रक्शन' ने भाग लिया था। तकनीकी जांच और दस्तावेजों की छानबीन के बाद 'जीएस कंस्ट्रक्शन' का टेंडर अपात्र घोषित कर दिया गया। वहीं, 'एकता एंटरप्राइजेज' ने कार्यालयीन अनुमानित दर से 0.45 प्रतिशत कम की किफायती दर प्रस्तुत कर टेंडर अपने नाम किया। कार्य आदेश जारी होने की तारीख से एक महीने के भीतर मुंबई के सभी प्रशासनिक वार्डों में मूर्तिकारों तक इन जैविक रंगों को पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। बीएमसी की इस दूरदर्शी पहल से मुंबई का पारंपरिक गणेशोत्सव इस बार प्रकृति और पर्यावरण के लिए पूरी तरह सुरक्षित रहेगा।

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