मुंबई में वायु प्रदूषण और अवैध मलबा डंपिंग पर रोक लगाने के लिए बीएमसी जल्द ‘एकात्मिक निर्माण और ध्वस्तीकरण कचरा प्रबंधन पोर्टल’ शुरू करेगी। जीपीएस ट्रैकिंग, जियो-फेंसिंग और डिजिटल निगरानी से मलबे की ढुलाई पर चौबीसों घंटे नजर रखी जाएगी।

मुंबई में तेजी से चल रहे पुनर्विकास प्रोजेक्ट्स, सड़कों के कंक्रीटीकरण, मेट्रो निर्माण और बड़े पैमाने पर हो रहे सरकारी व निजी निर्माण कार्यों के कारण बढ़ते धूल और वायु प्रदूषण पर अंकुश लगाने के लिए बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) अब अत्याधुनिक डिजिटल निगरानी व्यवस्था लागू करने जा रही है। इसके तहत अनधिकृत रूप से कहीं भी निर्माण मलबा फेंकने वालों पर कड़ी नजर रखने के लिए बीएमसी जल्द ही ‘एकात्मिक निर्माण और ध्वस्तीकरण कचरा प्रबंधन पोर्टल’ विकसित करेगी।

इस महत्वाकांक्षी परियोजना को लागू करने के लिए मनपा प्रशासन ने ‘ट्रेस रिसोर्स मैनेजमेंट प्राइवेट लिमिटेड’ का चयन किया है। इस डिजिटल प्रणाली को विकसित करने का निर्णय ‘निर्माण और ध्वस्तीकरण कचरा प्रबंधन नियम 2025’ तथा बॉम्बे हाई कोर्ट के दिशा-निर्देशों के तहत गठित उच्च स्तरीय समिति की सिफारिशों के बाद लिया गया है। इसके अलावा 8 मई 2026 को राज्य के मुख्य सचिव की अध्यक्षता में आयोजित समीक्षा बैठक में भी निर्देश दिए गए थे कि निर्माण मलबे के उत्पन्न होने से लेकर उसके अंतिम निस्तारण तक पूरी प्रक्रिया की चौबीसों घंटे डिजिटल निगरानी सुनिश्चित की जाए।

बीएमसी का यह नया पोर्टल उसकी मौजूदा ऑनलाइन भवन निर्माण अनुमति प्रणाली से सीधे जुड़ा होगा। इससे किसी भी निर्माण परियोजना के शुरू होने से पहले ही यह स्पष्ट हो जाएगा कि संबंधित स्थल से कितना मलबा निकलने की संभावना है। इस व्यवस्था के लागू होने के बाद बिल्डरों द्वारा मलबे से जुड़े आंकड़े छिपाने की गुंजाइश लगभग समाप्त हो जाएगी और पूरी प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बनेगी।

पूरी व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए निर्माण मलबे की ढुलाई करने वाले सभी डंपर और वाहनों में जीपीएस आधारित व्हीकल ट्रैकिंग सिस्टम तथा आधुनिक जियो-फेंसिंग तकनीक लगाई जाएगी। जियो-फेंसिंग की मदद से बीएमसी का केंद्रीय नियंत्रण कक्ष लगातार यह निगरानी कर सकेगा कि मलबे से भरे वाहन निर्धारित मार्गों पर ही चल रहे हैं या नहीं। यदि कोई डंपर चालक अधिकृत डंपिंग ग्राउंड तक पहुंचने के बजाय रास्ते में किसी सुनसान सड़क, फुटपाथ या आरे जैसी संवेदनशील जगह पर अवैध रूप से मलबा गिराने का प्रयास करेगा तो उसकी सूचना तत्काल बीएमसी को मिल जाएगी और संबंधित के खिलाफ तुरंत दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

बीएमसी इस डिजिटल परियोजना पर लगभग 1 करोड़ 11 लाख रुपये खर्च करेगी। इस कार्य के लिए चुनी गई संस्था ‘ट्रेस रिसोर्स मैनेजमेंट’ को इस क्षेत्र का व्यापक अनुभव है। इससे पहले संस्था ने दिल्ली नगर निगम के लिए ‘दिल्ली मालबे’ नाम से इसी प्रकार का एक सफल एकीकृत निर्माण कचरा प्रबंधन पोर्टल विकसित किया था। बीएमसी का मानना है कि उसी अनुभव के आधार पर मुंबई में भी यह प्रणाली प्रभावी रूप से लागू की जा सकेगी।

मनपा प्रशासन को उम्मीद है कि इस पारदर्शी और प्रामाणिक डिजिटल तकनीक के लागू होने के बाद शहर में अवैध डेब्रिज डंपिंग पर प्रभावी रोक लगेगी, निर्माण मलबे के प्रबंधन की पूरी प्रक्रिया अधिक जवाबदेह बनेगी और मुंबईकरों को स्वच्छ एवं शुद्ध हवा उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण सफलता मिलेगी।

Pratahkal Newsroom

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