बीएमसी आयुक्त अश्विनी भिडे का 'बैक टू बेसिक्स' मंत्र, बुनियादी सुविधाओं पर जोर
मुंबई की सड़कों, स्वच्छता और जल निकासी व्यवस्था को सुधारने के लिए आयुक्त ने 10 वर्षीय नियमावली और मानसून पूर्व कार्यों को समय पर पूरा करने के कड़े निर्देश दिए।

बृहन्मुंबई महानगरपालिका की नवनियुक्त आयुक्त अश्विनी भिडे ने मुंबई के चहुंमुखी विकास और नागरिकों को उच्च स्तरीय सुविधाएं प्रदान करने के उद्देश्य से 'बैक टू बेसिक्स' के सिद्धांत को शासन का मुख्य आधार बनाने की घोषणा की है। शनिवार, 11 अप्रैल 2026 को बीएमसी मुख्यालय में आयोजित महत्वपूर्ण मासिक समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए आयुक्त ने स्पष्ट किया कि प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता सड़क, स्वच्छता और जल निकासी जैसी बुनियादी सेवाओं को सुदृढ़ करना है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि मुंबई की सड़कों के निर्माण और रखरखाव के लिए रेलवे की कार्यप्रणाली की तर्ज पर एक 'आदर्श संचालनात्मक नियमावली' विकसित की जाए, जिसमें आगामी 10 वर्षों की यातायात आवश्यकताओं और भूमिगत उपयोगिताओं (यूटिलिटीज) का भविष्योन्मुखी खाका अनिवार्य रूप से शामिल हो।
प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही पर जोर देते हुए श्रीमती भिडे ने अधिकारियों को लोकप्रतिनिधियों और पार्षदों के साथ निरंतर संवाद बनाए रखने का सख्त आदेश दिया। उन्होंने कहा कि नालों की सफाई और सड़कों के निर्माण कार्य की दैनिक प्रगति रिपोर्ट सार्वजनिक की जानी चाहिए ताकि आम नागरिकों और जनप्रतिनिधियों को जमीनी हकीकत का ज्ञान रहे। आयुक्त ने बीएमसी की कार्यशैली में आधुनिकता का समावेश करते हुए 'बियॉन्ड बेसिक्स' की अवधारणा पेश की। इसके तहत उन्होंने ऑनलाइन फूड डिलीवरी और गिग वर्कर्स जैसे उभरते आर्थिक क्षेत्रों के लिए शहर के विकास नियोजन (डेवलपमेंट प्लान) में विशेष 'स्ट्रक्चरल सपोर्ट' प्रदान करने और डिलीवरी पॉइंट्स के लिए स्थान सुरक्षित करने जैसी दूरगामी सोच पर बल दिया।
आगामी मानसून की चुनौतियों को देखते हुए आयुक्त ने कड़ा रुख अपनाते हुए निर्देश दिया कि जिन सड़कों का काम 70 प्रतिशत से अधिक पूर्ण हो चुका है, उन्हें हर हाल में 1 जून से पहले समाप्त किया जाए। उन्होंने जलभराव की समस्या वाले पुराने हॉटस्पॉट्स के लिए दीर्घकालीन समाधान खोजने और यह सुनिश्चित करने को कहा कि सुरक्षा की दृष्टि से मुंबई का एक भी 'मैनहोल' खुला न रहे। स्वच्छता के प्रति अपने संकल्प को दोहराते हुए उन्होंने कहा कि स्वच्छता कोई अल्पकालिक प्रोजेक्ट नहीं बल्कि एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है। इसके लिए अधिकारियों को 'सेल्फ-डिसिप्लिन मोड' में रहकर नियमित फील्ड विजिट सुनिश्चित करनी होगी। आयुक्त का यह कड़ा रुख और 'बैक टू बेसिक्स' से 'बियॉन्ड बेसिक्स' तक का यह सफर मुंबई की नागरिक सुविधाओं में एक युगांतरकारी परिवर्तन लाने की दिशा में निर्णायक कदम माना जा रहा है।

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