मुंबई के समुद्र तटीय पर्यावरण को सुरक्षित बनाने और समंदर में छोड़े जाने वाले पानी की गुणवत्ता सुधारने के उद्देश्य से बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) सात प्रमुख स्थानों पर आधुनिक मलजल प्रक्रिया केंद्रों (एसटीपी) के निर्माण पर तेजी से काम कर रही है। इसी क्रम में महानगरपालिका आयुक्त अश्विनी भिडे ने अधिकारियों के उच्च स्तरीय दल के साथ मालाड में निर्माणाधीन एसटीपी प्लांट का स्थलीय निरीक्षण कर परियोजना की प्रगति की समीक्षा की और समय सीमा के भीतर कार्य पूरा करने के सख्त निर्देश दिए।

शनिवार सुबह हुए निरीक्षण के दौरान आयुक्त अश्विनी भिडे ने सिविल, मैकेनिकल और इलेक्ट्रिकल कार्यों की प्रगति पर संतोष व्यक्त किया। हालांकि उन्होंने संबंधित अधिकारियों और ठेकेदारों को स्पष्ट निर्देश दिए कि इस जनहित से जुड़ी परियोजना में किसी भी प्रकार की देरी स्वीकार नहीं की जाएगी और सभी कार्य निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरे किए जाएं।

मुंबई को प्रदूषण मुक्त बनाने की इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत बीएमसी वरली, धारावी, बांद्रा, घाटकोपर, भांडुप, वर्सोवा और मालाड में अत्याधुनिक एसटीपी का निर्माण कर रही है। इन सातों निर्माणाधीन मलजल प्रक्रिया केंद्रों की कुल जल शोधन क्षमता 2,464 मिलियन लीटर प्रतिदिन है। इससे पहले बीएमसी अप्रैल 2020 में कोलाबा में 37 एमएलडी क्षमता वाला एसटीपी सफलतापूर्वक शुरू कर चुकी है। आयुक्त ने कहा कि सभी नए प्रोजेक्ट्स को जल्द से जल्द क्रियाशील बनाना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

मालाड परियोजना की समीक्षा बैठक में अतिरिक्त महानगरपालिका आयुक्त अभिजीत बांगर, स्थानीय पार्षद कमरजहां सिद्दीकी, उपायुक्त भाग्यश्री कापसे और प्रमुख अभियंता अशोक मेंगड़े सहित कई वरिष्ठ तकनीकी विशेषज्ञ मौजूद रहे। बैठक में परियोजना की गुणवत्ता से किसी प्रकार का समझौता किए बिना निर्माण कार्य की गति बढ़ाने के निर्देश दिए गए।

आयुक्त अश्विनी भिडे ने कंप्यूटर प्रेजेंटेशन के माध्यम से मालाड एसटीपी परियोजना की प्रमुख विशेषताओं की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस प्लांट की क्षमता 454 मिलियन लीटर प्रतिदिन है। परियोजना का निर्माण कार्य जुलाई 2022 में शुरू हुआ था। इसके निर्माण की अवधि छह वर्ष निर्धारित की गई है, जबकि इसके संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी अगले 15 वर्षों के लिए तय की गई है।

उन्होंने बताया कि इस प्लांट में विश्वस्तरीय 'सिक्वेंशियल बैच रिएक्टर' तकनीक का उपयोग किया जा रहा है, जिसके माध्यम से प्रतिदिन 454 मिलियन लीटर गंदे पानी का द्वितीय स्तर तक शोधन किया जाएगा। इसमें से 227 मिलियन लीटर पानी को और अधिक शुद्ध करने के लिए तृतीय स्तर की प्रक्रिया से भी गुजारा जाएगा।

वर्तमान में मालाड के पुराने प्लांट में केवल प्राथमिक स्तर की सफाई के बाद पानी को खाड़ी में छोड़ा जाता है, जबकि नए प्रोजेक्ट के शुरू होने पर पानी का उच्च स्तर तक शोधन किया जाएगा। इसके साथ ही कीचड़ प्रोसेसिंग की व्यवस्था होगी और उससे उत्पन्न बायोगैस से बिजली का उत्पादन भी किया जाएगा।

परियोजना के मार्ग में आने वाली प्रमुख बाधा मैंग्रोव हटाने के लिए आवश्यक सभी वैधानिक और पर्यावरणीय अनुमतियां प्रशासन को प्राप्त हो चुकी हैं। बीएमसी के अनुसार, नए मलजल प्रक्रिया केंद्र के पूरी तरह चालू होने के बाद मुंबई के समुद्र तटीय जल की गुणवत्ता में महत्वपूर्ण सुधार होगा, जिससे समुद्री जीवों और पर्यावरण को लाभ मिलेगा।

इस आधुनिक एसटीपी परियोजना का सीधा लाभ पश्चिमी उपनगर के दहिसर, बोरिवली, कांदिवली, मालाड और गोरेगांव सहित घनी आबादी वाले क्षेत्रों के लाखों नागरिकों को मिलेगा। बीएमसी का मानना है कि यह परियोजना भविष्य में मुंबई को स्वच्छ, सुंदर और पर्यावरण-अनुकूल वैश्विक महानगर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

Pratahkal Bureau

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