बीएमसी में बुनियादी ढांचा और नागरिक विकास परियोजनाओं के लिए 'प्रोजेक्ट मैनेजमेंट कंसलटेंट' की नियुक्ति का मामला एक बड़े राजनीतिक और प्रशासनिक गतिरोध में तब्दील हो गया है। विपक्ष के कड़े विरोध और जनप्रतिनिधियों की तीखी आलोचनाओं को दरकिनार करते हुए, बीएमसी स्थायी समिति ने दो महत्वपूर्ण प्रस्तावों को अपनी अंतिम मंजूरी दे दी है। इस विवादास्पद निर्णय के तहत, अब बीएमसी प्रशासन सामान्य टेंडर प्रक्रिया का पालन किए बिना, सीधे 3 करोड़ रुपये की सामूहिक लागत से दो अलग-अलग बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए तीसरे पक्ष के सलाहकारों को नियुक्त कर सकेगा।

बीएमसी में इन दिनों चल रही कार्यप्रणाली को लेकर राजनीतिक दलों के निर्वाचित प्रतिनिधियों और पार्षदों ने मोर्चा खोल दिया है। जनप्रतिनिधियों का गंभीर आरोप है कि नगर निगम अपने आंतरिक तकनीकी विभागों पर विश्वास करने के बजाय, बाहरी कंसलटेंट एजेंसियों पर जनता की गाढ़ी कमाई का भारी-भरकम फंड पानी की तरह बहा रहा है। इन तमाम विरोधों के बावजूद, प्रशासन द्वारा समिति के समक्ष रखे गए दोनों प्रस्तावों को बिना किसी निविदा प्रक्रिया के पारित कर दिया गया है। आमतौर पर बीएमसी के नियमों के अनुसार, किसी भी परियोजना के लिए कंसलटेंट की नियुक्ति एक पारदर्शी टेंडर प्रक्रिया के माध्यम से होती है, जो 'विस्तृत परियोजना रिपोर्ट' तैयार करने से लेकर निर्माण कार्यों की निगरानी का कार्य करती है। हालांकि, विशेष और आपातकालीन परिस्थितियों में प्रशासन के पास स्थायी समिति से विशेष प्रशासनिक मंजूरी लेकर बिना टेंडर के भी सलाहकारों को नियुक्त करने का अधिकार है, जिसका उपयोग इस बार प्रशासन ने किया है।

इस फैसले के तहत पारित पहले प्रस्ताव में आईआईटी-मुंबई को 55 लाख रुपये की लागत से एक विशेष जांच एजेंसी के रूप में सीधे नियुक्त किया गया है। यह संस्थान दहिसर में बनने वाले अत्याधुनिक 'ट्रांजिट हब' की व्यवहार्यता और तकनीकी बारीकियों की जांच करेगा। यह प्रस्तावित हब लंबी दूरी की बसों, मेट्रो, निजी वाहनों और जलमार्गों को जोड़ने वाला एक विशाल केंद्र होगा, जहाँ यात्रियों के लिए होटल, रेस्तरां और टिकट बुकिंग जैसी सुविधाएं उपलब्ध होंगी। वहीं, दूसरे प्रस्ताव के अंतर्गत 2.45 करोड़ रुपये की लागत से मशहूर एजेंसी अर्नस्ट एंड यंग को बीएमसी के महत्वाकांक्षी 'पार्टिसिपेट मुंबई' अभियान के लिए मुख्य तकनीकी और प्रबंधन सलाहकार नियुक्त किया गया है। यह अभियान एक एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जिसका उद्देश्य नागरिकों, एनजीओ और कॉर्पोरेट घरानों को एक मंच पर लाकर शहर के विकास के लिए सीएसआर फंड और सामाजिक विचारों को सही दिशा देना है।

स्थायी समिति ने बीएमसी की इस दलील को स्वीकार किया कि नगर निगम की जिम्मेदारियां अब केवल बुनियादी कार्यों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि सामाजिक और पर्यावरणीय विकास तक विस्तृत हो चुकी हैं, इसलिए टेंडर नियमों में ढील आवश्यक थी। यह निर्णय बीएमसी के कार्य करने के तरीके में आए बड़े बदलाव का संकेत है, जो आने वाले समय में विकास कार्यों की गति और पारदर्शिता पर एक बड़ी बहस को जन्म देगा।

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