मुंबई की उन लाखों निवासियों के लिए राहत की उम्मीद फिलहाल अधर में लटक गई है, जो बिना ऑक्युपेशन सर्टिफिकेट (ओसी) वाली इमारतों में अपनी पूरी जमा-पूंजी लगाकर रहने को मजबूर हैं। बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) द्वारा इन इमारतों को नियमित करने के लिए प्रस्तावित एमनेस्टी स्कीम पर गुरुवार, 25 जून 2026 को हुई वैधानिक स्थायी समिति की बैठक में तीखी राजनीतिक बहस देखने को मिली। तीन महीने पूर्व पेश किए गए इस प्रस्ताव पर नगरसेवकों के बीच आम सहमति न बन पाने के कारण निर्णय को अगली बैठक तक के लिए स्थगित कर दिया गया है।

बैठक के दौरान राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों ने योजना के विभिन्न पहलुओं पर चिंता जताते हुए इसे केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया के बजाय जवाबदेही का सवाल बना दिया। बीजेपी के नगरसेवक प्रवीण दरेकर ने जहां बिना ओसी वाली इमारतों पर व्यावसायिक जल शुल्क लगाने का सुझाव रखा, वहीं शिवसेना (शिंदे गुट) के अमेय घोले ने योजना के दायरे को और अधिक पारदर्शी बनाने की वकालत की। दूसरी ओर, कांग्रेस के अशरफ आजमी और शिवसेना (यूबीटी) के यशोधर फणसे ने इस बात पर जोर दिया कि बिल्डरों और आर्किटेक्ट्स की लापरवाही का खामियाजा निर्दोष फ्लैट खरीदारों को भुगतना पड़ रहा है, इसलिए दोषियों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। मनसे नेता यशवंत किल्लेदार ने प्रस्ताव की जल्दबाजी पर सवाल उठाए, जबकि बीजेपी की शीतल गंभीर ने व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की स्थिति स्पष्ट करने की मांग की।

प्रस्ताव के कानूनी और राजस्व संबंधी पहलुओं पर कांग्रेस की ट्यूलिप मिरांडा ने कड़ा विरोध दर्ज कराया। बीजेपी के तेजिंदर सिंह तिवाना ने पात्रता नियमों को उदार बनाने का आग्रह किया, वहीं शिवसेना (यूबीटी) की श्रद्धा जाधव ने आंशिक ओसी वाली इमारतों की समस्या को रेखांकित किया। सभागृह नेता गणेश खणकर ने चर्चा का सार प्रस्तुत करते हुए स्पष्ट किया कि जवाबदेही केवल निवासियों की नहीं, बल्कि उन डेवलपर्स की भी तय होनी चाहिए जिनकी विफलता के कारण ओसी का संकट पैदा हुआ।

अंततः स्थायी समिति के अध्यक्ष प्रभाकर शिंदे ने निर्णय लेते हुए कहा कि इस संवेदनशील विषय पर जल्दबाजी में कोई भी कदम उठाने के बजाय सदस्यों के सुझावों को शामिल कर इसकी गहन और बारीक समीक्षा अनिवार्य है। यह स्थगन मुंबई के उन हजारों परिवारों के लिए प्रतीक्षा की एक और कड़ी परीक्षा है, जो लंबे समय से अपने घरों को वैध कराने की बाट जोह रहे हैं। आने वाली बैठक में इस योजना का भविष्य ही नहीं, बल्कि बिल्डरों की जवाबदेही तय करने की दिशा में नगर निगम का रुख भी स्पष्ट होगा।

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