मुंबई। बीएमसी की साधारण सभा में करीब 20 हजार करोड़ रुपये से अधिक कीमत की जमीनों को निजी बिल्डरों को सौंपने के प्रस्ताव को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने आ गए। विपक्षी नगरसेवकों ने आरोप लगाया कि महापौर रितु तावड़े ने इस संवेदनशील मुद्दे पर चर्चा कराने के बजाय सुधार समिति के 10 प्रस्तावों को बिना किसी बहस के पारित कर दिया।

सत्ताधारी दल के इस रवैये का विरोध करते हुए कांग्रेस और अन्य विपक्षी नगरसेवकों ने बीएमसी सभागृह से वॉकआउट कर दिया। सभागृह से बाहर आने के बाद विपक्षी नेताओं ने बीएमसी की गैलरी में ही समानांतर बैठक आयोजित कर अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया।

इसके बाद सभी विपक्षी नेताओं ने बीएमसी के अतिरिक्त आयुक्त अविनाश ढाकने का घेराव किया। विपक्ष ने मांग की कि बिना चर्चा के पारित किए गए इन सभी नियमों के खिलाफ प्रस्तावों को तुरंत रद्द किया जाए। विपक्षी नेताओं ने चेतावनी दी कि ऐसा नहीं होने पर वे इस मामले को अदालत में लेकर जाएंगे।

विपक्ष की मांग पर अतिरिक्त आयुक्त अविनाश ढाकने ने आश्वासन दिया कि वे पूरे विषय से बीएमसी आयुक्त को अवगत कराएंगे और उचित कानूनी कदम उठाए जाएंगे। इस दौरान विरोध में शामिल नेताओं ने आरोप लगाया कि वरली स्थित सेंचुरी मिल की जमीन मजदूरों के मकानों के लिए आरक्षित थी, जिसे बिल्डरों को देने की साजिश रची जा रही है।

विपक्षी नगरसेवकों ने कहा कि मुंबई की जनता के अधिकारों और जमीनों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। बीएमसी प्रशासन और पुलिस के हस्तक्षेप के बाद सभागृह में बनी स्थिति को शांत कराया गया, लेकिन करीब 20 हजार करोड़ रुपये से अधिक कीमत की जमीनों के प्रस्ताव को लेकर हुआ यह विवाद मुंबई की राजनीति में गरमा गया है।

Pratahkal Bureau

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