मुंबई। मायानगरी के व्यस्ततम व्यापारिक केंद्रों—मस्जिद बंदर और गिरगांव—में शातिर ठगों के एक गिरोह ने अपनी चालाकी से सोने के बाजार में हड़कंप मचा दिया है। चार सदस्यों के इस गिरोह ने बेहद योजनाबद्ध तरीके से दो अलग-अलग जौहरियों को अपना निशाना बनाते हुए करीब 1.75 करोड़ रुपये मूल्य के सोने के आभूषणों पर हाथ साफ कर दिया। इस सनसनीखेज धोखाधड़ी के सामने आने के बाद वीपी रोड और पायधुनी पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए अलग-अलग मामले दर्ज किए हैं। पुलिस द्वारा जारी की गई जानकारी के अनुसार, इस गिरोह के मुख्य आरोपियों की पहचान राजू बबलू डालबेरा, चंदू कृष्णा राय, मोहित राघवेंद्र वर्मा और रमेश शांतीलाल उर्फ शंकरा राम के रूप में हुई है।

धोखाधड़ी की पहली और सबसे बड़ी वारदात कालबादेवी-जवेरी बाजार क्षेत्र के प्रतिष्ठित 'सियारा ज्वेल्स' के मालिक आकाश अशोक सुराणा के साथ हुई। इस वारदात की पटकथा मुख्य आरोपी मोहित राघवेंद्र वर्मा ने बड़ी ही चतुराई से लिखी थी। मोहित ने सबसे पहले सुराणा का विश्वास जीतने के लिए दिसंबर माह में उनसे 13 लाख रुपये का सोना नकद देकर खरीदा। विश्वास जमने के बाद, 17 दिसंबर को मोहित ने 1,517 ग्राम वजन के सोने के कंगनों का एक बड़ा ऑर्डर दिया। सौदे को असली दिखाने के लिए उसने सुरक्षा राशि के तौर पर 30 लाख रुपये नकद भी जमा किए और शेष 1.5 करोड़ रुपये बाद में देने का वादा किया। सुराणा उस पर भरोसा कर चुके थे, इसलिए उन्होंने डेढ़ करोड़ रुपये के कंगन गिरगांव स्थित एक पते पर अपने दो कर्मचारियों के हाथ भेज दिए। वहां पहुंचने पर पता चला कि मोहित मौजूद नहीं था, बल्कि उसकी जगह रमेश शांतीलाल और एक अन्य व्यक्ति ने आभूषण प्राप्त किए और मौका देखते ही वहां से रफूचक्कर हो गए।

ठगी का दूसरा मामला मस्जिद बंदर इलाके का है, जहाँ एक मैन्युफैक्चरिंग यूनिट चलाने वाले स्वर्णकार सुब्रतो भूतनाथ पाल को विश्वासघात का शिकार बनाया गया। नवंबर माह में पाल ने आभूषण तैयार करने के उद्देश्य से 212 ग्राम सोना राजू बबलू डालबेरा और चंदू कृष्णा राय नामक कारीगरों को सौंपा था। लेकिन इन दोनों आरोपियों की मंशा कुछ और ही थी। वे आभूषण बनाने के बजाय वह कीमती सोना लेकर फरार हो गए। एक तरफ विश्वास पर टिका यह व्यापारिक रिश्ता तार-तार हुआ, तो दूसरी तरफ पुलिस अब इन शातिर अपराधियों की तलाश में संभावित ठिकानों पर छापेमारी कर रही है। मुंबई के सर्राफा बाजार में हुई इस करोड़ों की ठगी ने व्यापारियों की सुरक्षा और विश्वास पर आधारित व्यापारिक लेनदेन पर एक गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया है।

Pratahkal Bureau

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