मुंबई की जल सुरक्षा के लिए बीएमसी ने भांडुप में एशिया के सबसे बड़े और आधुनिक जल शुद्धीकरण संयंत्र के निर्माण में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं। जानें कैसे यह मेगा प्रोजेक्ट 2028 से पहले शहर की बदल देगा पानी की तस्वीर।

तस्वीर में बीएमसी कमिश्नर अश्विनी भिडे भांडुप जल शुद्धीकरण संयंत्र के निर्माण कार्य का निरीक्षण करते हुए अधिकारियों को समयबद्ध काम पूरा करने के निर्देश दे रही हैं।
मुंबई की भविष्य की जल जरूरतों को सुनिश्चित करने और शहर की जल आपूर्ति व्यवस्था को आधुनिक बनाने की दिशा में बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) ने एक बड़ा कदम उठाया है। बीएमसी कमिश्नर अश्विनी भिडे ने भांडुप संकुल में निर्माणाधीन 2,000 मिलियन लीटर प्रतिदिन (एमएलडी) क्षमता वाले अत्याधुनिक जल शुद्धीकरण संयंत्र का सघन दौरा किया। इस महत्वपूर्ण परियोजना की समीक्षा करते हुए उन्होंने अधिकारियों और इंजीनियरों को निर्देशित किया है कि सिविल, मैकेनिकल और इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग से संबंधित कार्यों में तीव्रता लाई जाए, ताकि इस मेगा प्रोजेक्ट को जुलाई 2028 की निर्धारित समय-सीमा से पहले ही पूरा किया जा सके।
भांडुप स्थित वर्तमान जल शुद्धीकरण केंद्र लगभग 43 वर्ष पुराना होने के कारण संरचनात्मक रूप से कमजोर हो गया है। इसके स्थान पर 7.4 हेक्टेयर भूमि पर एशिया का सबसे आधुनिक और विशाल रिप्लेसमेंट प्लांट विकसित किया जा रहा है। यह परियोजना मुंबई के पूर्वी और पश्चिमी उपनगरों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप स्वच्छ पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने में मील का पत्थर साबित होगी। वर्तमान में कार्यस्थल पर मिट्टी परीक्षण, बैरिकेडिंग, बिजली टावरों का स्थानांतरण और वृक्षारोपण जैसे प्राथमिक कार्य गति पकड़ चुके हैं। कमिश्नर ने ठेकेदारों को कार्य की गति बढ़ाने के लिए अतिरिक्त मानवशक्ति और आधुनिक मशीनें तैनात करने की स्पष्ट हिदायत दी है।
अपनी यात्रा के दौरान, बीएमसी कमिश्नर ने भांडुप में ही निर्माणाधीन 215 एमएलडी क्षमता वाले सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का भी निरीक्षण किया, जिसका सिविल कार्य लगभग पूर्ण हो चुका है। उन्होंने निर्देश दिए कि इस पर्यावरण-अनुकूल प्लांट को अक्टूबर 2026 तक हर हाल में क्रियाशील किया जाए। इस प्लांट से शोधित पानी का उपयोग उद्योगों, उद्यानों और निर्माण कार्यों में किया जाएगा, जिससे पीने के पानी के प्राकृतिक स्रोतों पर दबाव कम होगा। इसके अतिरिक्त, उन्होंने 'गोरेगांव-मुलुंड लिंक रोड' परियोजना के तहत बन रही जुड़वां टनल और दिंडोशी-गोरेगांव फ्लाईओवर का भी जायजा लिया। कमिश्नर ने निर्माण कार्य को उच्च गुणवत्ता के साथ निर्धारित समयावधि में पूरा करने पर जोर दिया, ताकि मुंबई के बुनियादी ढांचे को मजबूती और यातायात को सुगम बनाया जा सके।

