बांद्रा स्थित प्रसिद्ध नेविल डीसूजा फुटबॉल मैदान को लेकर चल रही खबरों पर बीएमसी ने बॉम्बे हाईकोर्ट में स्थिति स्पष्ट कर दी है। बीएमसी ने अदालत में दाखिल हलफनामे में कहा है कि मैदान को विकास योजना से हटाया नहीं गया है और न ही इसे किसी कन्वेंशन सेंटर या प्रदर्शनी स्थल में बदला जा रहा है।

बीएमसी ने बताया कि मुंबई फुटबॉल एसोसिएशन की ओर से दायर याचिका समय से पहले और बेबुनियाद है। अदालत को दिए स्पष्टीकरण में बीएमसी ने कहा कि बांद्रा का यह मैदान वर्तमान में स्वीकृत विकास योजना 2034 के तहत पूरी तरह से खेल के मैदान के रूप में ही आरक्षित है।

बीएमसी के अनुसार, यदि भविष्य में जमीन के इस्तेमाल में किसी भी तरह का बदलाव किया जाता है, तो महाराष्ट्र क्षेत्रीय एवं नगर रचना अधिनियम 1966 की धारा 37 के तहत निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन करना अनिवार्य होगा। इस प्रक्रिया के तहत आम जनता और प्रभावित लोगों से आपत्तियां और सुझाव मांगे जाते हैं। इसके बाद ही किसी बदलाव को लेकर अंतिम फैसला लिया जाता है।

मैदान के अस्तित्व को लेकर स्थानीय खिलाड़ियों और खेल प्रेमियों के बीच चिंता बनी हुई थी। बीएमसी के आधिकारिक स्पष्टीकरण के बाद उन्हें राहत मिली है। हाईकोर्ट में दिए गए इस बयान के बाद स्पष्ट है कि नेविल डीसूजा फुटबॉल मैदान में खेल गतिविधियां बिना किसी रुकावट के जारी रहेंगी और इसका इस्तेमाल किसी व्यावसायिक उद्देश्य के लिए नहीं किया जाएगा।

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