भारतीय संगीत जगत के एक देदीप्यमान स्वर्णिम युग का आज करुण अंत हो गया है। सुप्रसिद्ध पार्श्व गायिका, पद्म विभूषण और महाराष्ट्र भूषण जैसी गरिमामयी उपाधियों से अलंकृत आशा भोसले के निधन की हृदयविदारक सूचना से संपूर्ण राष्ट्र में शोक की लहर व्याप्त है। अपनी जादुई और सम्मोहक आवाज के माध्यम से सात दशकों तक करोड़ों संगीत प्रेमियों के दिलों पर अटूट राज करने वाली 'आशा ताई' ने मुंबई में अपनी अंतिम सांस ली। उनके पार्थिव शरीर के अंतिम दर्शन हेतु संगीत, कला और राजनीति जगत की तमाम दिग्गज हस्तियों का तांता लगा हुआ है।

मुंबई की महापौर रितू तावडे ने आशा जी के आवास पर पहुंचकर समस्त मुंबईकरों की ओर से उन्हें भावपूर्ण अंतिम विदाई दी। महापौर ने दिवंगत गायिका के पार्थिव शरीर पर पुष्पचक्र अर्पित कर अपनी गहरी संवेदनाएं प्रकट कीं और भारतीय शास्त्रीय व सुगम संगीत में उनके द्वारा दिए गए अतुलनीय योगदान को रेखांकित किया। आशा भोसले का अवसान न केवल महाराष्ट्र अपितु वैश्विक संगीत क्षितिज के लिए एक ऐसी अपूरणीय क्षति है, जिसकी रिक्तता को कभी भी भरा नहीं जा सकेगा।

इस शोकपूर्ण अवसर पर महापौर रितू तावडे ने कहा कि आशा जी की कालजयी आवाज में वह अद्वितीय शक्ति समाहित थी जो हर पीढ़ी को एक सूत्र में पिरोती थी। उन्होंने अपने हजारों गीतों के माध्यम से भारतीय संस्कृति और कलात्मकता को वैश्विक ऊंचाइयों पर प्रतिष्ठित किया। अंतिम दर्शन के समय वहां उपस्थित हजारों प्रशंसकों की आंखें अपनी प्रिय गायिका के बिछोह में नम थीं। प्रशासन द्वारा अंतिम संस्कार हेतु विशेष एवं व्यापक प्रबंध सुनिश्चित किए गए हैं, ताकि प्रशंसक सुव्यवस्थित रीति से अपने प्रिय कलाकार को अंतिम विदाई दे सकें। संगीत का यह अनमोल 'कोहिनूर' भले ही आज सदैव के लिए खामोश हो गया है, किंतु उनकी मधुर आवाज आने वाली अनंत पीढ़ियों के कानों में निरंतर रस घोलती रहेगी।

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