अहमदाबाद। गुजरात के ढोलका में भरोसे और व्यापार के सौ साल पुराने इतिहास को कलंकित करने वाला एक बड़ा सनसनीखेज मामला सामने आया है। एक प्रतिष्ठित जूलरी कारोबारी परिवार ने चांदी में ऊंचे मुनाफे का जाल बुनकर 56 निवेशकों की गाढ़ी कमाई के करीब 30 करोड़ रुपये हड़प लिए और रातों-रात फरार हो गए। पीढ़ियों पुराने इस प्रतिष्ठान पर आंख मूंदकर भरोसा करने वाले लोग अब ठगा सा महसूस कर रहे हैं। पुलिस ने इस मामले में एफआईआर दर्ज कर आरोपियों की तलाश तेज कर दी है, जिसे गुजरात की हालिया सबसे बड़ी पोंजी स्कीमों में से एक माना जा रहा है।

इस पूरी साजिश के केंद्र में ढोलका का एक विख्यात जूलरी प्रतिष्ठान है, जिसकी साख करीब एक सदी पुरानी बताई जाती है। पुलिस जांच के अनुसार, आरोपी परिवार की चौथी पीढ़ी इस व्यवसाय का संचालन कर रही थी। मुख्य आरोपी घनश्याम सोनी और उनके दो बेटों यश सोनी तथा दीप सोनी ने मिलकर निवेश की एक लुभावनी योजना तैयार की। उन्होंने निवेशकों को चांदी में निवेश करने पर बाजार के उतार-चढ़ाव से इतर हर महीने 3,000 से 5,000 रुपये प्रति किलोग्राम का निश्चित रिटर्न देने का वादा किया। उस समय बाजार में चांदी की कीमत लगभग 80,000 रुपये प्रति किलोग्राम थी, और इस भारी मुनाफे के लालच में आकर स्थानीय लोगों ने अपनी जमापूंजी इनके हवाले कर दी।

अहमदाबाद ग्रामीण एसपी ओमप्रकाश जाट ने मामले का खुलासा करते हुए बताया कि आरोपियों ने बड़े ही शातिर तरीके से लोगों का विश्वास जीता। शुरुआत में कुछ निवेशकों को समय पर अच्छा रिटर्न दिया गया, ताकि समाज में उनकी योजना की विश्वसनीयता बढ़े और लोग और अधिक रकम निवेश करें। करीब दो साल तक यह सिलसिला सुचारू रूप से चलता रहा। लेकिन जैसे ही निवेश की राशि बड़ी हुई, दिसंबर के अंतिम सप्ताह में घनश्याम, यश और दीप सोनी सारा पैसा समेटकर गायब हो गए। वर्तमान में उनके सभी ज्ञात ठिकाने बंद हैं और मोबाइल फोन स्विच ऑफ आ रहे हैं।

ढोलका पुलिस ने शुरुआत में 16 निवेशकों की शिकायत पर मामला दर्ज किया था, जिन्होंने 6.4 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का आरोप लगाया था। हालांकि, जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ी, पीड़ितों की संख्या बढ़कर 56 हो गई और ठगी का आंकड़ा 30 करोड़ रुपये के पार निकल गया। जांच अधिकारियों का मानना है कि जैसे-जैसे और पीड़ित सामने आएंगे, यह राशि और भी बढ़ सकती है। यह घटना न केवल एक वित्तीय अपराध है, बल्कि उस सामाजिक विश्वास पर भी गहरी चोट है जो एक सदी पुराने व्यापारिक प्रतिष्ठान ने कमाया था। पुलिस की टीमें अब तकनीकी सर्विलांस और मुखबिरों के जरिए फरार पिता-पुत्रों की घेराबंदी में जुटी हैं।

Pratahkal Bureau

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