राजसमंद, 3 दिसंबर। तेरापंथ धर्मसंघ के आचार्य महाश्रमण की मेवाड़ यात्रा अब अपने समापन चरण में प्रवेश कर चुकी है। 3 दिसंबर को आचार्य महाश्रमण ने केलवा से विहार आरंभ किया और पड़ासली पहुँचकर स्थानीय श्रद्धालुओं के बीच समय व्यतीत किया। सांयकाल में उन्होंने पुनः विहार करते हुए संबोधी होते हुए धानीन पहुँचे, जहाँ उनका रात्रि प्रवास हुआ। इस अवसर पर ख्यालीलाल तातेड, मदनलाल तातेड सहित अनेक श्रावक-श्राविकाएँ उपस्थित रहीं और आचार्य महाश्रमण से आशीर्वाद प्राप्त किया।

एक माह लंबी इस मेवाड़ यात्रा का औपचारिक समापन 5 दिसंबर को महाराणा प्रताप की विजय स्थली दिवेर में होने जा रहा है। इस अवसर पर मंगल भावना समारोह के साथ दायित्व हस्तांतरण कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। मेवाड़ जैन श्वेताम्बर तेरापंथी कांफ्रेंस द्वारा दायित्व रूपी ध्वज आचार्य महाश्रमण मर्यादा महोत्सव समिति छोटी खाटू को सौंपा जाएगा। यात्रा मार्ग के दौरान मेवाड़ के विभिन्न क्षेत्रों के श्रद्धालुओं ने आचार्य महाश्रमण के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया।

पड़ासली में विहार के दौरान आचार्य महाश्रमण ने आगम के संदर्भ में विचार व्यक्त करते हुए कहा कि संसार में विभिन्न दृष्टिकोण वाले व्यक्ति होते हैं। कुछ व्यक्ति मिथ्या दृष्टिकोण के होते हैं, जबकि अन्य सम्यक दृष्टिकोण के। दोनों प्रकार के व्यक्ति समान कार्य को अलग-अलग तरीके से संपन्न करते हैं, और उनके कर्मों के परिणाम में भी भिन्नता होती है। आचार्य महाश्रमण ने यह भी स्पष्ट किया कि केवल धर्मात्मक कार्य करने से मोक्ष की प्राप्ति संभव नहीं है, बल्कि उसे सम्यक दृष्टिकोण और शुद्ध भावनाओं के साथ करना आवश्यक है।

मेवाड़ यात्रा की यह अंतिम चरण श्रद्धालुओं और समाज के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह न केवल आध्यात्मिक अनुभवों का माध्यम है, बल्कि धर्म और सम्यक दृष्टिकोण की सीख को जन-जन तक पहुँचाने का महत्वपूर्ण अवसर भी प्रदान करती है।

Pratahkal Bureau

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