शेयर बाज़ार कारोबारी और उनकी पत्नी बने “डिजिटल अरेस्ट” के शिकार, ठगों ने उड़ाए 58 करोड़ रुपये
मुंबई में एक 72 वर्षीय शेयर बाज़ार कारोबारी और उनकी पत्नी को ठगों ने “डिजिटल अरेस्ट” के नाम पर फंसाकर 58 करोड़ रुपये की ठगी कर ली। आरोपी खुद को ईडी और सीबीआई अधिकारी बताकर वीडियो कॉल पर धमकाते थे। पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर जांच शुरू की है।

मुंबई में साइबर अपराध का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने शहर के कारोबारी वर्ग को हिला कर रख दिया है। 72 वर्षीय एक शेयर बाज़ार कारोबारी और उनकी पत्नी को ठगों ने “डिजिटल अरेस्ट” के जाल में फंसाकर 58 करोड़ रुपये की भारी ठगी कर ली। यह मामला अब तक की सबसे बड़ी साइबर ठगी के रूप में सामने आ रहा है, जिसमें अपराधियों ने आधुनिक तकनीक और मनोवैज्ञानिक दबाव का खतरनाक संयोजन अपनाया।
पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने खुद को प्रवर्तन निदेशालय (ED) और केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) के अधिकारी बताकर पीड़ित दंपती को विश्वास में लिया। उन्होंने उन्हें मनी लॉन्ड्रिंग के एक कथित मामले में फंसाने की धमकी दी और कहा कि यदि वे जांच में सहयोग नहीं करते तो उन्हें “डिजिटल अरेस्ट” किया जाएगा। डर और दबाव में आकर कारोबारी ने अगस्त से लेकर दो महीनों के भीतर अलग-अलग बैंक खातों में 58 करोड़ रुपये स्थानांतरित कर दिए।
ठगों ने पूरी साजिश सुनियोजित तरीके से रची थी। उन्होंने फर्जी पहचान पत्र, सरकारी मुहर वाले दस्तावेज़ और वीडियो कॉल के ज़रिए खुद को केंद्रीय एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारी के रूप में पेश किया। वीडियो कॉल के दौरान उन्होंने सरकारी कार्यालय जैसी पृष्ठभूमि का उपयोग किया ताकि पीड़ित को यकीन हो कि वह असली जांच एजेंसियों से बात कर रहे हैं। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान कारोबारी और उनकी पत्नी को लगातार “निगरानी में रहने” की चेतावनी दी जाती रही।
मामले की शिकायत मिलने पर मुंबई पुलिस की साइबर सेल ने जांच शुरू की और तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया। गिरफ्तार किए गए लोगों पर आरोप है कि उन्होंने फर्जी दस्तावेज़ तैयार किए, बैंक खातों का उपयोग धन हस्तांतरण के लिए किया और खुद को सरकारी अधिकारी बताने के लिए वीडियो कॉलिंग के माध्यम से विश्वास हासिल किया। पुलिस के अनुसार, प्रत्येक आरोपी के खाते में औसतन 25 लाख रुपये जमा पाए गए हैं।
पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि 19 अगस्त को पीड़ित से पहली बार सुब्रमण्यम और करण शर्मा नाम के व्यक्तियों ने संपर्क किया था। उन्होंने कई मोबाइल नंबरों का इस्तेमाल किया और खुद को सीबीआई और ईडी का प्रतिनिधि बताया। धीरे-धीरे उन्होंने दंपती पर इतना मानसिक दबाव बनाया कि वे अपने बचाव में ही अपनी जमा पूंजी सौंप बैठे।
मुंबई पुलिस का कहना है कि यह अब तक की सबसे जटिल और उच्चस्तरीय साइबर ठगी में से एक है। पुलिस आरोपियों के नेटवर्क और धन के स्रोत की गहराई से जांच कर रही है। अधिकारियों ने नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी अज्ञात व्यक्ति द्वारा सरकारी एजेंसी के नाम पर दी जा रही धमकी या कॉल पर तुरंत स्थानीय पुलिस या साइबर हेल्पलाइन को सूचित करें।
यह घटना न केवल साइबर अपराधियों की नई तकनीक को उजागर करती है बल्कि यह भी दर्शाती है कि डिजिटल युग में जागरूकता और सतर्कता ही सबसे बड़ी सुरक्षा है।

Ruturaj Ravan
यह प्रातःकाल मल्टीमीडिया में वेबसाइट मैनेजर और सोशल मीडिया एक्जीक्यूटिव के रूप में कार्यरत हैं, और पिछले तीन वर्षों से पत्रकारिता व डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इससे पूर्व उन्होंने दैनिक प्रहार में वेबसाइट प्रबंधन और सोशल मीडिया के लिए रचनात्मक कंटेंट निर्माण और रणनीतियों में अनुभव अर्जित किया। इन्होंने कोल्हापुर के छत्रपति शिवाजी महाराज विश्वविद्यालय से स्नातक और हैदराबाद के सत्या इंस्टीट्यूट से उच्च शिक्षा पूरी की। इन्हें SEO मैनेजमेंट, सोशल मीडिया और उससे संबंधित रणनीतियाँ तैयार करने में व्यापक अनुभव है।
