मुंबई में एक बड़े वित्तीय घोटाले का पर्दाफाश हुआ है, जिसने निवेशकों और आम जनता के बीच हड़कंप मचा दिया है। मामला ओजस्वी फाउंडेशन चैरिटेबल ट्रस्ट और उसकी सहायक कंपनी ओजस्वी एआई से जुड़ा है, जिसने विदेशी मुद्रा व्यापार में निवेश पर 7 से 8 प्रतिशत मासिक रिटर्न का वादा कर लगभग 150 निवेशकों से करीब 14 करोड़ रुपये ठगे।

यह घोटाला तब सामने आया जब खार स्थित एक केमिस्ट शॉप के मालिक प्रदीप इंदरचंद परिहार (34) ने 8 अक्टूबर को पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। परिहार ने ट्रस्ट के निर्देशानुसार 1.01 करोड़ रुपये का निवेश किया था, लेकिन रिटर्न बंद होने के बाद उसे धोखाधड़ी का अहसास हुआ। पुलिस जांच में पता चला कि परिहार अकेले नहीं थे, बल्कि देश भर में दर्जनों अन्य निवेशकों के साथ भी समान धोखाधड़ी हुई थी। खार पुलिस ने इस मामले में दस लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। आरोपियों में सागर ओधवजी सोजिजा, धवल सोजित्रा, मयूर सोजिचा, रुचित वैकारिया, जयदीप नारिया, दिवेश कुमार सटानी, निशांत कोलाडिया, राजेश गोयल, नारायण और महेंद्र कुमावत शामिल हैं।

घोटाले की तह तक जाने पर मामला अब मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) को सौंपा गया है। पुलिस जांच में यह सामने आया है कि परिहार ने दिसंबर 2022 में मीरा रोड स्थित जीसीसी क्लब में आयोजित एक भव्य कॉर्पोरेट कार्यक्रम में ट्रस्ट के ट्रस्टियों से मुलाकात की थी। इस कार्यक्रम में ट्रस्ट ने निवेशकों को विदेशी मुद्रा व्यापार प्लेटफॉर्म्स जैसे विंसर एफएक्स और विंजो पर एआई आधारित लेनदेन के माध्यम से भारी मुनाफा कमाने का दावा किया। उपस्थित लोगों को यह भी बताया गया कि कुछ निवेशकों को पहले ही रिटर्न के साथ विदेश यात्रा और मोबाइल हैंडसेट जैसे उपहार मिल चुके हैं।

प्रदीप परिहार ने शुरुआत में 4 लाख रुपये का निवेश किया और दो महीने में 18,407 रुपये का रिटर्न मिलने के बाद भरोसे में आकर 1.01 करोड़ रुपये तक का निवेश किया। इस रकम को उन्होंने अलग-अलग खातों में जमा किया, जिनमें ऑबिन एंटरप्राइजेज, क्विकथिक कॉरपोरेशन और एयरबोन इनोवेशन शामिल थे। हालांकि, अक्टूबर 2023 के बाद रिटर्न देना अचानक बंद हो गया, जिससे निवेशकों में असमंजस और चिंता पैदा हो गई।

नवंबर 2023 में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने ओजस्वी फाउंडेशन और ओजस्वी एआई के परिसरों पर छापा मारा। जांच के दौरान यह खुलासा हुआ कि इन संस्थाओं ने अनधिकृत विदेशी मुद्रा व्यापार मंच पर अवैध निवेश किया था। इसके अलावा, यह पता चला कि देश भर में 150 से अधिक निवेशकों को धोखा दिया गया और उनके पैसों का गबन किया गया।

मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा अब ट्रस्टियों के सभी संबंधित बैंक खातों, एजेंटों और लेन-देन की गहन जांच कर रही है। जांच में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि कैसे एक चैरिटी ट्रस्ट के नाम पर करोड़ों रुपये के गोरखधंधे को अंजाम दिया गया और कितने निवेशक इससे प्रभावित हुए।

इस मामले ने न केवल निवेशकों की वित्तीय सुरक्षा पर सवाल उठाए हैं, बल्कि देश में चैरिटी संस्थाओं और वित्तीय निवेश योजनाओं की पारदर्शिता पर भी ध्यान आकर्षित किया है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे घोटाले यह दर्शाते हैं कि निवेशकों को हमेशा पूरी जांच और सावधानी के साथ किसी भी प्लेटफॉर्म में पैसा लगाना चाहिए।

अंततः यह मामला भारतीय वित्तीय प्रणाली में सुरक्षा और निगरानी के महत्व को उजागर करता है। आर्थिक अपराध शाखा की कार्रवाई और प्रवर्तन निदेशालय की जांच से यह उम्मीद की जा रही है कि दोषियों को सजा मिले और भविष्य में निवेशकों के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित हो।

Ruturaj Ravan

Ruturaj Ravan

यह प्रातःकाल मल्टीमीडिया में वेबसाइट मैनेजर और सोशल मीडिया एक्जीक्यूटिव के रूप में कार्यरत हैं, और पिछले तीन वर्षों से पत्रकारिता व डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इससे पूर्व उन्होंने दैनिक प्रहार में वेबसाइट प्रबंधन और सोशल मीडिया के लिए रचनात्मक कंटेंट निर्माण और रणनीतियों में अनुभव अर्जित किया। इन्होंने कोल्हापुर के छत्रपति शिवाजी महाराज विश्वविद्यालय से स्नातक और हैदराबाद के सत्या इंस्टीट्यूट से उच्च शिक्षा पूरी की। इन्हें SEO मैनेजमेंट, सोशल मीडिया और उससे संबंधित रणनीतियाँ तैयार करने में व्यापक अनुभव है।

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