मुंबई। ऑनलाइन निवेश के नाम पर ठगी का जाल लगातार गहराता जा रहा है। मुंबई में सामने आए एक ताज़ा मामले ने फिर से यह चेतावनी दी है कि साइबर अपराधी किस तरह सोशल मीडिया और निवेश के झांसे का इस्तेमाल कर करोड़ों रुपये ऐंठ लेते हैं। इस बार शिकार बने हैं मुलुंड निवासी 74 वर्षीय एक सेवानिवृत्त लॉजिस्टिक्स पेशेवर, जिनसे कथित तौर पर 3.4 करोड़ रुपये की ठगी की गई।

पुलिस के अनुसार, पीड़ित बुजुर्ग फेसबुक पर “दिया शर्मा” नामक एक महिला के संपर्क में आए। महिला ने पहले दोस्ती बढ़ाई और उसके बाद उन्हें एक व्हाट्सएप लिंक भेजा। लिंक के जरिए बुजुर्ग को “बोनान्जा” नामक एक ऑनलाइन निवेश कंपनी से जोड़ा गया। वहां उन्हें उच्च रिटर्न का लालच देकर निवेश करने के लिए राजी किया गया। विश्वास में लेकर उनसे करोड़ों रुपये धीरे-धीरे जमा कराए गए।

मामले की जांच में सामने आया कि इस धोखाधड़ी के पीछे एक संगठित गिरोह काम कर रहा था। पूर्वी साइबर सेल ने इस संबंध में दो चचेरे भाइयों—25 वर्षीय नरेशकुमार माली और 29 वर्षीय सुरेशकुमार माली—को गिरफ्तार किया है। पुलिस का कहना है कि दोनों ने पूछताछ में स्वीकार किया कि वे अपने ही रिश्तेदार विष्णु माली के कहने पर कई बैंक खाते खोलते थे। विष्णु को मामले का मास्टरमाइंड बताया जा रहा है और वह फिलहाल फरार है।

गिरफ्तार आरोपियों ने खुलासा किया कि वे लगभग दो वर्षों से “किराए पर बैंक खाते उपलब्ध कराने” के धंधे में शामिल थे। वे मास्टरमाइंड विष्णु को हर खाते के बदले 50,000 रुपये मासिक शुल्क लेते थे और उसे उन खातों तक पहुंच प्रदान करते थे। जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपियों ने “जालोर पे फिनटेक टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड” नाम की एक फर्जी कंपनी के नाम से खाते खोले थे। इन खातों का इस्तेमाल ठगी से कमाए गए पैसों को सफेद दिखाने और आगे ट्रांसफर करने के लिए किया जाता था।

पुलिस ने बताया कि पीड़ित द्वारा निवेश किए गए पैसों में से लगभग 18 लाख रुपये सीधे इस फर्जी कंपनी के खाते में जमा किए गए थे। वर्तमान में आरोपियों के सभी बैंक खातों को फ्रीज कर दिया गया है। साइबर सेल की टीमें अब मास्टरमाइंड विष्णु माली की तलाश में छापेमारी कर रही हैं।

घटना की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि एक बुजुर्ग, जिन्होंने अपना पूरा जीवन परिश्रम में बिताया, ऑनलाइन निवेश के नाम पर सुनियोजित धोखाधड़ी का शिकार बन गए। यह मामला उन सैकड़ों घटनाओं में से एक है, जिनमें सोशल मीडिया के जरिए लोगों को फंसाकर उनकी जीवन भर की कमाई लूटी जा रही है।

अधिकारियों ने नागरिकों को सतर्क रहने की सलाह दी है। साइबर पुलिस का कहना है कि किसी भी अनजान व्यक्ति से सोशल मीडिया पर हुई मुलाकात के आधार पर वित्तीय लेन-देन करने से बचना चाहिए। साथ ही, निवेश के नाम पर भेजे जाने वाले किसी भी लिंक या ऐप की जांच-पड़ताल किए बिना उस पर भरोसा करना बेहद खतरनाक साबित हो सकता है।

वर्तमान में पुलिस आरोपियों से पूछताछ कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस नेटवर्क का विस्तार कितना बड़ा है और कितने लोग अब तक इसकी चपेट में आ चुके हैं। वहीं, फरार मास्टरमाइंड विष्णु की गिरफ्तारी के लिए विशेष टीमों को तैनात किया गया है।

यह मामला एक बार फिर साइबर युग की कठोर सच्चाई को सामने लाता है—जहां सुविधा और तकनीक के साथ-साथ ठगी के नए-नए तरीके भी जन्म ले रहे हैं। ऐसे में नागरिकों की जागरूकता ही उनकी सबसे बड़ी सुरक्षा साबित हो सकती है।

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Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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