शेल कंपनियों के माध्यम से 5,500 करोड़ रुपये के फर्जी दान घोटाले का खुलासा, IT विभाग ने देशव्यापी कार्रवाई की
आयकर विभाग की जांच में खुलासा हुआ कि पंजीकृत लेकिन मान्यता-रहित राजनीतिक दलों के माध्यम से 36 शेल कंपनियों के जरिए 5,500 करोड़ रुपये से अधिक का फर्जी दान घोटाला हुआ। 1.6 लाख संदिग्ध दाताओं के नाम सामने आए, और राउंड-ट्रिपिंग के माध्यम से फर्जी टैक्स कटौती का दावा किया गया।

मुंबई। आयकर विभाग (आईटी) की देशव्यापी जांच में एक बड़े पैमाने पर फर्जी दान घोटाले का खुलासा हुआ है। जांच में यह सामने आया कि पंजीकृत लेकिन मान्यता-रहित राजनीतिक दलों के माध्यम से करीब 5,500 करोड़ रुपये से अधिक की रकम को शेल कंपनियों के जरिए घुमाया गया। यह रकम तीन वर्षों में कथित तौर पर 36 शेल कंपनियों के जरिए लेनदेन की गई, जिसमें लगभग 1.6 लाख संदिग्ध दाताओं के नाम सामने आए हैं।
अधिकारियों के अनुसार, इस घोटाले में ‘राउंड-ट्रिपिंग’ की तकनीक का प्रयोग किया गया। इस प्रक्रिया में राजनीतिक दलों को दिखाए गए दान को नकद रूप में वापस मूल दाताओं को लौटाया गया, जबकि दाताओं ने इसके बदले आयकर कानून की धारा 80GGC के तहत फर्जी टैक्स कटौती का दावा किया। इस तांत्रिक चाल से सरकारी खजाने को हजारों करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, “राउंड-ट्रिपिंग के माध्यम से दान की राशि वापस लौटाई जाती है, जिससे दाता टैक्स में कटौती का गलत दावा करता है और कर विभाग को भारी नुकसान उठाना पड़ता है।”
आईटी विभाग ने इस मामले में 14 जुलाई को देशभर में समन्वित कार्रवाई की थी। इस अभियान में 150 से अधिक ठिकानों पर छापे मारे गए, जिनमें बिचौलियों, आरयूपीपी और चार्टर्ड अकाउंटेंट्स के कार्यालय शामिल थे। जांच के दौरान 1.53 लाख आयकर रिटर्न सामने आए, जिनमें 4,478 करोड़ रुपये की फर्जी टैक्स कटौती का दावा किया गया था।
जांच में यह भी सामने आया कि 2,764 आरयूपीपी के विश्लेषण के आधार पर 85 प्रतिशत से अधिक राजनीतिक दलों ने आवश्यक वित्तीय दस्तावेज, जैसे कि आयकर रिटर्न, ऑडिट रिपोर्ट और योगदान रिपोर्ट, दाखिल नहीं किए थे। अधिकारियों का मानना है कि यह मामला राजनीतिक चंदों के माध्यम से धनशोधन और टैक्स चोरी का एक जटिल नेटवर्क उजागर करता है, और यह राष्ट्रीय वित्तीय प्रणाली की पारदर्शिता के लिए गंभीर चुनौती पेश करता है।
इस जांच से यह स्पष्ट होता है कि फर्जी राजनीतिक दान केवल कर चोरी तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह बड़े पैमाने पर वित्तीय अनुशासन और नियमों की अनदेखी का संकेत भी देते हैं। आयकर विभाग की यह कार्रवाई इस तरह की वित्तीय अनियमितताओं को रोकने और देश के राजस्व संरक्षण को सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
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Ruturaj Ravan
यह प्रातःकाल मल्टीमीडिया में वेबसाइट मैनेजर और सोशल मीडिया एक्जीक्यूटिव के रूप में कार्यरत हैं, और पिछले तीन वर्षों से पत्रकारिता व डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इससे पूर्व उन्होंने दैनिक प्रहार में वेबसाइट प्रबंधन और सोशल मीडिया के लिए रचनात्मक कंटेंट निर्माण और रणनीतियों में अनुभव अर्जित किया। इन्होंने कोल्हापुर के छत्रपति शिवाजी महाराज विश्वविद्यालय से स्नातक और हैदराबाद के सत्या इंस्टीट्यूट से उच्च शिक्षा पूरी की। इन्हें SEO मैनेजमेंट, सोशल मीडिया और उससे संबंधित रणनीतियाँ तैयार करने में व्यापक अनुभव है।
