Brent Crude Price Drop 2026 : पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) के रणक्षेत्र से आती शांति की सुगबुगाहट ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में भूकंप ला दिया है। बुधवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में एक बड़ी और ऐतिहासिक गिरावट दर्ज की गई, जिसने दुनिया भर के निवेशकों और नीति निर्माताओं का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। युद्ध विराम (सीजफायर) की बढ़ती उम्मीदों के बीच ब्रेंट क्रूड वायदा में सुबह के कारोबार के दौरान ही 7 प्रतिशत की भारी गिरावट देखी गई, जिससे कीमतें 97.18 डॉलर प्रति बैरल के इंट्राडे निचले स्तर पर पहुँच गईं। अमेरिकी डब्ल्यूटीआई (WTI) क्रूड भी इस मंदी से अछूता नहीं रहा और 6 प्रतिशत से ज्यादा टूटकर 86.72 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया।

भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए वरदान साबित होगी गिरावट :

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि कच्चे तेल की कीमतों में आई यह कमी भारत जैसे बड़े आयातक देश के लिए किसी संजीवनी से कम नहीं है। भारत अपनी तेल जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा आयात करता है, ऐसे में वैश्विक कीमतों में कमी आने से देश के चालू खाता घाटा (सीएडी) और राजकोषीय दबाव में बड़ी राहत मिलने की संभावना है। आर्थिक विश्लेषकों के अनुसार, कच्चे तेल की कीमत में हर 10 डॉलर प्रति बैरल का बदलाव भारत की जीडीपी के मुकाबले सीएडी को 0.3 से 0.5 प्रतिशत तक प्रभावित करता है। साथ ही, इससे उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित महंगाई में भी 20-30 बेसिस पॉइंट की कमी आ सकती है, जिससे आम जनता को पेट्रोल-डीजल की कीमतों में राहत मिलने की उम्मीद जगी है।

तकनीकी स्तर और बाजार का गणित :

तकनीकी संकेतों पर नजर डालें तो पिछले एक हफ्ते में कमोडिटी बाजार में भारी उतार-चढ़ाव देखा गया है। ब्रेंट क्रूड, जो हाल ही में 101 डॉलर प्रति बैरल के मनोवैज्ञानिक स्तर को छू रहा था, अब अपनी ऊंचाई से 10 प्रतिशत से ज्यादा गिरकर करीब 91 डॉलर के पास संघर्ष कर रहा है। विश्लेषकों का कहना है कि:

  • सपोर्ट लेवल : अमेरिकी कच्चा तेल फिलहाल 85 से 87 डॉलर के अहम स्तर के पास बना हुआ है। यदि यह 85 डॉलर से नीचे फिसलता है, तो कीमतें 81-82 डॉलर तक जा सकती हैं।
  • रेजिस्टेंस लेवल : यदि भू-राजनीतिक तनाव फिर से बढ़ता है और कीमतें 92-94 डॉलर के पार निकलती हैं, तो दोबारा 100 डॉलर प्रति बैरल का स्तर देखा जा सकता है।

वैश्विक बाजारों का मिला-जुला रुख :

जहाँ एक ओर तेल की कीमतों में गिरावट ने वैश्विक बाजारों को प्रभावित किया, वहीं शेयर बाजारों में भी इसका असर देखने को मिला। अमेरिका के एसएंडपी 500 और नैस्डैक क्रमशः 0.84% और 0.37% की गिरावट के साथ बंद हुए। इसके विपरीत, एशियाई बाजारों में जबरदस्त तेजी का माहौल रहा। जापान का निक्केई 3.26% और दक्षिण कोरिया का कोस्पी 3.36% उछलकर बंद हुआ, जो निवेशकों के बीच बढ़ते भरोसे को दर्शाता है।

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Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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