उत्तर प्रदेश की मंडियों में खाद्यान्न की भारी आवक के बावजूद खुले बाजार की कीमतें न्यूनतम समर्थन मूल्य से कम होने के कारण किसानों को आर्थिक नुकसान हो रहा है।

UP Mandi Bhav 2026 : उत्तर प्रदेश के कृषि परिदृश्य और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से एक बेहद गंभीर और विचारणीय खबर सामने आ रही है। राज्य की अनाज मंडियों में इन दिनों फसलों की भारी आवक देखी जा रही है, लेकिन इसके साथ ही सरकारी न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) और खुले बाजार की कीमतों के बीच का अंतर किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच रहा है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, २६ मई २०२६ तक के तीन दिनों के फ्रीज्ड डेटा से यह साफ जाहिर होता है कि कई मुख्य अनाज फसलों के दाम खुले बाजार में सरकार द्वारा निर्धारित एमएसपी से काफी नीचे चल रहे हैं, जिससे किसानों को आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। यह स्थिति तब है जब सूबे के किसान अपनी पूरी पूंजी और मेहनत लगाकर देश का पेट भरने के लिए अनाज मंडियों तक पहुंचा रहे हैं।

इस पूरे घटनाक्रम में सबसे चौंकाने वाली स्थिति गेहूं और मक्के की खरीद को लेकर बनी हुई है। देश के सबसे बड़े खाद्यान्न उत्पादक राज्य उत्तर प्रदेश की मंडियों में गेहूं की बंपर आवक दर्ज की जा रही है। पिछले तीन दिनों में गेहूं की कुल आवक एक लाख मीट्रिक टन के करीब पहुंच गई है, जहां अकेले २४ मई को लगभग ३९,९३८ मीट्रिक टन गेहूं मंडियों में आया, जो २६ मई को घटकर २६,१९९ मीट्रिक टन रह गया। हालांकि, सरकार ने वर्ष २०२६-२७ के लिए गेहूं का एमएसपी २५८५ रुपये प्रति क्विंटल तय किया है, लेकिन किसानों को बाजार में औसतन २४७० से २४७५ रुपये प्रति क्विंटल का ही भाव मिल पा रहा है। यही हाल मक्के का भी है, जिसकी सरकारी एमएसपी २४०० रुपये प्रति क्विंटल तय है, जबकि मंडियों में इसकी १०,००० मीट्रिक टन से अधिक की भारी आवक के बीच किसानों को महज १७१२ से १८१६ रुपये प्रति क्विंटल के बीच समझौता करना पड़ रहा है, जो कि एमएसपी से करीब ६०० रुपये कम है।

मोटे अनाजों (मिलेट्स) की बात करें तो वहां भी स्थिति बहुत ज्यादा अनुकूल नहीं है। बाजरा का न्यूनतम समर्थन मूल्य २७७५ रुपये प्रति क्विंटल घोषित है, लेकिन मंडियों में इसकी कीमत १९२४ रुपये प्रति क्विंटल तक गिर चुकी है। ज्वार का हाल भी कुछ ऐसा ही है, जहां ३६९९ रुपये के एमएसपी के मुकाबले बाजार भाव केवल २००० रुपये के आसपास मंडरा रहा है। हालांकि, धान (सामान्य) की कीमतें जरूर सरकारी एमएसपी २३६९ रुपये के काफी करीब २३५१ रुपये प्रति क्विंटल तक बनी हुई हैं, जिससे धान उत्पादकों को थोड़ी राहत मिली है। इसके विपरीत, जौ के बाजार में थोड़ी तेजी देखी गई है, जहां २१५० रुपये के एमएसपी के मुकाबले २४ मई को बाजार में मूल्य २२१९ रुपये प्रति क्विंटल दर्ज किया गया।

दूसरी ओर, तिलहन के बाजार से किसानों के लिए कुछ सकारात्मक और राहत भरी खबरें भी आ रही हैं। उत्तर प्रदेश की मंडियों में सरसों की मांग काफी मजबूत बनी हुई है, जिसके कारण ६२०० रुपये प्रति क्विंटल के एमएसपी के मुकाबले सरसों का बाजार भाव ६६१९ रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गया है। मूंगफली के बाजार में तो अप्रत्याशित उछाल देखा गया है, जहां ७२६३ रुपये के सरकारी एमएसपी के मुकाबले व्यापारियों ने ९५१२ रुपये प्रति क्विंटल तक की ऊंची बोली लगाई है। हालांकि, तिल (सेसमम) की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव देखा गया, जो २२ मई को १०,३२० रुपये के उच्च स्तर पर रहने के बाद २६ मई को गिरकर ८६४६ रुपये प्रति क्विंटल पर आ गया, जबकि इसका सरकारी एमएसपी ९८४६ रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित है।

इस बाजार चक्र और कीमतों के उतार-चढ़ाव का सीधा असर राज्य के लाखों किसानों की क्रय शक्ति और उनकी आगामी फसल की तैयारियों पर पड़ता है। कानूनी और आधिकारिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो सरकार द्वारा घोषित एमएसपी एक सुरक्षा कवच की तरह काम करना चाहिए, लेकिन खुले बाजार में इतनी बड़ी गिरावट प्रशासनिक खरीद व्यवस्था और जमीनी स्तर पर सरकारी खरीद केंद्रों की सक्रियता पर बड़े सवालिया निशान खड़े करती है। इस वित्तीय वर्ष के अंत में यह देखना बेहद अहम होगा कि क्या राज्य सरकार इन विसंगतियों को दूर करने के लिए मंडियों में कोई ठोस हस्तक्षेप करती है या फिर किसानों को अपनी मेहनत की उपज इसी तरह औने-पौने दामों में बेचने पर मजबूर होना पड़ेगा।

Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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