petrol diesel availability India : दुनिया भर में गहराते ऊर्जा संकट और पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा को लेकर एक अभूतपूर्व और आश्वस्त करने वाली तस्वीर पेश की है। जहां एक ओर कई विकसित देश 'राष्ट्रीय ऊर्जा आपातकाल', ईंधन की राशनिंग और पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारों से जूझ रहे हैं, वहीं भारत सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि देश के पास न केवल पर्याप्त तेल है, बल्कि भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए अभेद्य सुरक्षा चक्र भी तैयार है। होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) जैसी रणनीतिक जगहों पर अस्थिरता के बावजूद, भारत की तेल आपूर्ति श्रृंखला पहले से कहीं अधिक मजबूत होकर उभरी है।

वैश्विक आपूर्ति का नया समीकरण और भारतीय रिफाइनरियों का दम :

भारत ने अपनी रणनीतिक दूरदर्शिता का परिचय देते हुए तेल आयात के स्रोतों का विविधीकरण किया है। वर्तमान में भारत दुनिया के 41 से अधिक देशों से कच्चा तेल प्राप्त कर रहा है। पश्चिमी देशों और अंतरराष्ट्रीय बाजारों से मिल रही उच्च मात्रा ने किसी भी संभावित व्यवधान की भरपाई कर दी है। देश की ताकत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि भारत की सभी तेल रिफाइनरियां वर्तमान में अपनी कुल क्षमता से 100 प्रतिशत से भी अधिक पर कार्य कर रही हैं। इतना ही नहीं, भारतीय तेल कंपनियों ने अगले 60 दिनों के लिए कच्चे तेल की निर्बाध आपूर्ति पहले ही सुनिश्चित कर ली है, जो किसी भी आपात स्थिति के लिए एक ठोस कवच की तरह है।

दुनिया का 'एनर्जी हब' बना भारत: आंकड़ों की जुबानी :

भारत आज केवल अपनी जरूरतों को पूरा नहीं कर रहा, बल्कि वैश्विक ऊर्जा मानचित्र पर एक 'नेट एक्सपोर्टर' (शुद्ध निर्यातक) के रूप में स्थापित हो चुका है। भारत की इस मजबूती के पीछे कुछ प्रमुख स्तंभ हैं:

  • चौथा सबसे बड़ा शोधक : भारत पेट्रोलियम शोधन (Refining) में विश्व स्तर पर चौथे स्थान पर है।
  • पांचवां सबसे बड़ा निर्यातक : परिष्कृत ईंधन के मामले में भारत दुनिया का पांचवां सबसे बड़ा निर्यातक है, जो 150 से अधिक देशों को ईंधन सप्लाई करता है।
  • विशाल नेटवर्क : देश भर में 1 लाख से अधिक खुदरा ईंधन केंद्र (पेट्रोल पंप) बिना किसी रुकावट के संचालित हो रहे हैं।

भ्रामक सूचनाओं पर प्रहार और रणनीतिक भंडारण का सच :

पिछले कुछ दिनों में सोशल मीडिया पर प्रसारित उन वीडियो और खबरों को सरकार ने पूरी तरह निराधार बताया है, जिनमें देश में केवल 6 दिनों का तेल भंडार होने का दावा किया गया था। वास्तविकता इसके ठीक उलट है। भारत की कुल भंडारण क्षमता 74 दिनों की है। पश्चिम एशिया संकट के 27वें दिन भी भारत के पास लगभग 60 दिनों का वास्तविक भंडार मौजूद है। इसमें कच्चा तेल, उत्पाद भंडार और भूमिगत गुफाओं में स्थित 'सामरिक पेट्रोलियम भंडार' (SPR) शामिल हैं। किसी भी वैश्विक उथल-पुथल की स्थिति में, प्रत्येक भारतीय नागरिक के लिए कम से कम दो महीने की सुरक्षित आपूर्ति पूरी तरह सुनिश्चित है।

पंप मालिकों को बड़ी राहत और सुचारू वितरण :

पंपों पर भीड़ और घबराहट को रोकने के लिए सरकार ने न केवल आपूर्ति बढ़ाई है, बल्कि आर्थिक मोर्चे पर भी कदम उठाए हैं। पेट्रोल पंप मालिकों की कार्यशील पूंजी (Working Capital) की समस्याओं को देखते हुए तेल कंपनियों ने क्रेडिट अवधि को 1 दिन से बढ़ाकर 3 दिन कर दिया है। इससे छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों के पंपों पर भी तेल की उपलब्धता निरंतर बनी रहेगी। डिपो रात-रात भर चालू रखकर मांग की पूर्ति कर रहे हैं, ताकि किसी भी नागरिक को असुविधा न हो।

Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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