सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) के चेयरमैन तुहिन कांता पांडेय के बयान के बाद मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज ऑफ इंडिया (MCX) के शेयरों में गिरावट दर्ज की गई, जिससे निवेशकों के बीच अनिश्चितता का माहौल बन गया। 4 मई को शुरुआती कारोबार में तेजी दिखाने के बाद स्टॉक पर दबाव बढ़ा और यह 3% तक टूटकर 2,870.40 रुपए के इंट्राडे लो पर पहुंच गया।

यह गिरावट उस समय आई जब IMC कैपिटल मार्केट्स कॉन्फ्रेंस में बोलते हुए तुहिन कांता पांडेय ने स्पष्ट किया कि केंद्रीय बैंक और बीमा नियामक बैंकों और बीमा कंपनियों को कमोडिटी डेरिवेटिव्स में निवेश की अनुमति देने के पक्ष में नहीं हैं। उन्होंने कहा कि SEBI अब इस मुद्दे को रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) और इंश्योरेंस रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (IRDAI) के साथ आगे नहीं उठाएगा। उनके अनुसार, कमोडिटी डेरिवेटिव्स बीमा कंपनियों के लिए विशेष रूप से प्रासंगिक नहीं हैं, क्योंकि उनका निवेश फोकस आमतौर पर लंबी अवधि पर केंद्रित होता है।

गौरतलब है कि पिछले साल सितंबर में SEBI ने बाजार को मजबूत करने के उद्देश्य से बैंकों और पेंशन फंड्स को कमोडिटी ट्रेडिंग में शामिल करने पर चर्चा की बात कही थी। पांडेय ने यह भी बताया कि देश के पेंशन फंड रेगुलेटर ने भी इस दिशा में विचार किया था, हालांकि इस पर कोई अंतिम निर्णय हुआ है या नहीं, यह स्पष्ट नहीं किया गया।

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर MCX का शेयर 3% से अधिक गिरकर 2,870.40 रुपए के स्तर तक पहुंच गया। MCX देश का सबसे बड़ा कमोडिटी एक्सचेंज है, जहां सोना, चांदी, क्रूड ऑयल और प्राकृतिक गैस जैसे प्रमुख कमोडिटी प्रोडक्ट्स की ट्रेडिंग होती है। ऐसे में इस क्षेत्र से जुड़ी किसी भी बड़ी नीति या नियामकीय टिप्पणी का सीधा असर इसके शेयरों पर दिखाई देता है।

हालांकि, इंट्राडे में गिरावट के बाद शेयरों में आंशिक रिकवरी भी देखी गई। दिन के अंत में MCX का शेयर 1.53% की गिरावट के साथ 2,926.10 रुपए पर बंद हुआ। हालिया प्रदर्शन पर नजर डालें तो पिछले एक सप्ताह में स्टॉक में 3% से अधिक और एक महीने में करीब 20% की तेजी दर्ज की गई है। वर्ष 2026 में अब तक यह शेयर 33% से अधिक चढ़ चुका है। लंबी अवधि में प्रदर्शन और भी मजबूत रहा है, जहां एक वर्ष में लगभग 133% और तीन वर्षों में करीब 950% की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।

इस बीच, तुहिन कांता पांडेय ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टूल्स को लेकर भी SEBI की चिंता जाहिर की। उन्होंने कहा कि SEBI जल्द ही बाजार से जुड़े इंटरमीडियरी के लिए एक एडवाइजरी जारी करेगा, जिसमें एन्थ्रोपिक्स मिथोस जैसे एआई टूल्स से जुड़े संभावित जोखिमों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। SEBI का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सभी इंटरमीडियरी इन तकनीकों के उपयोग से पहले संभावित जोखिमों को समझें और आवश्यक सतर्कता बरतें।

इस घटनाक्रम ने कमोडिटी बाजार में नियामकीय दृष्टिकोण और भविष्य की भागीदारी को लेकर नई बहस को जन्म दिया है, जिसका सीधा प्रभाव निवेशकों की धारणा और बाजार की दिशा पर पड़ सकता है।

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Pratahkal Bureau

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