Fertilizer availability India : भारतीय कृषि के आधार स्तंभ, उर्वरक की आपूर्ति को लेकर फैलाई जा रही तमाम आशंकाओं और किल्लत के दावों पर केंद्र सरकार ने पूर्ण विराम लगा दिया है। एक आधिकारिक बयान जारी करते हुए सरकार ने स्पष्ट किया है कि देश की उर्वरक सुरक्षा न केवल मजबूत है, बल्कि रबी और आगामी खरीफ सीजन के लिए आपूर्ति आवश्यकता से कहीं अधिक बनी हुई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ती कीमतों और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारत ने अपनी खाद भंडारण व्यवस्था को एक अभेद्य दुर्ग में तब्दील कर दिया है, जिससे यह सुनिश्चित हो गया है कि अन्नदाता को खेतों में पोषक तत्वों की कमी का सामना नहीं करना पड़ेगा।

उर्वरक विभाग द्वारा जारी किए गए हालिया आंकड़े चौंकाने वाले और राहत देने वाले हैं। हाल ही में संपन्न हुए रबी 2025-26 सीजन के दौरान यूरिया की उपलब्धता 257.59 लाख मीट्रिक टन (एलएमटी) रही, जबकि इसकी वास्तविक आवश्यकता मात्र 196.06 एलएमटी थी। इसी प्रकार डीएपी, एमओपी और एनपीके जैसी श्रेणियों में भी उपलब्धता मांग के मुकाबले काफी अधिक दर्ज की गई। मौजूदा अप्रैल माह के आंकड़ों पर नजर डालें तो यूरिया की 69.33 एलएमटी उपलब्धता के मुकाबले केवल 18.17 एलएमटी की आवश्यकता है, जो सरकार की अग्रिम योजना और कुशल लॉजिस्टिक्स प्रबंधन का प्रत्यक्ष प्रमाण है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि यूरिया की अंतरराष्ट्रीय कीमत 4,000 रुपये प्रति बोरी होने के बावजूद, किसानों को यह मात्र 266.5 रुपये में उपलब्ध कराई जा रही है।

आगामी खरीफ 2026 सीजन की तैयारियों को लेकर सरकार ने रणनीतिक बढ़त हासिल कर ली है। कुल 390.54 एलएमटी की अनुमानित आवश्यकता के मुकाबले लगभग 46 प्रतिशत यानी 180 एलएमटी स्टॉक पहले से ही प्रारंभिक भंडार के रूप में सुरक्षित है। यह पिछले वर्षों के औसत 33 प्रतिशत के स्तर से काफी अधिक है। आपूर्ति श्रृंखला को निर्बाध बनाए रखने के लिए राज्यों के कृषि सचिवों के साथ निरंतर समन्वय किया जा रहा है और जिला स्तर पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है। घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए प्राकृतिक गैस की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है, जिससे संयंत्र पूरी क्षमता के साथ काम कर रहे हैं।

कानूनी और प्रशासनिक मोर्चे पर भी सरकार ने सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। राज्यों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि उर्वरकों की हेराफेरी, जमाखोरी, कालाबाजारी या किल्लत का भ्रम फैलाकर दहशत पैदा करने वाले तत्वों के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाए। वैश्विक स्तर पर भी भारतीय दूतावास सक्रिय रूप से वैकल्पिक स्रोतों की तलाश में जुटे हैं, ताकि आयात में विविधता बनी रहे। लगभग 25 एलएमटी यूरिया की वैश्विक निविदाएं पहले ही सुनिश्चित की जा चुकी हैं। यह व्यापक तैयारी न केवल भ्रामक दावों को खारिज करती है, बल्कि यह भी सुनिश्चित करती है कि भारत की खाद्य सुरक्षा और कृषि उत्पादकता की नींव पूरी तरह सुरक्षित है।

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Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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