येरगाव्हाण ग्राम पंचायत में सुबह 11 बजे लटका ताला, पांच गांवों के नागरिक आक्रोशित
कोरपना तालुका के येरगाव्हाण में कार्यालय बंद होने से शासकीय कार्य ठप्प, ग्रामीणों ने दी प्रशासन को आंदोलन की चेतावनी।

कोरपना तालुका के अंतर्गत आने वाले येरगाव्हाण ग्राम पंचायत कार्यालय का लचर और लापरवाह कामकाज एक बार फिर सबके सामने आया है। सोमवार सुबह करीब 11 बजे जब विभिन्न कार्यों के लिए नागरिक ग्राम पंचायत कार्यालय पहुंचे, तो उन्हें मुख्य दरवाजे पर ताला लटका मिला। इस घटना से उपस्थित नागरिकों में तीव्र आक्रोश की लहर दौड़ गई है।
पांच गांवों का कामकाज ठप्प
इस ग्राम पंचायत के अधिकार क्षेत्र में येरगव्हाण, गुडा, कमलापूर, बोरगाव खुर्द और बोरगाव बुद्रुक जैसे पांच महत्वपूर्ण गांव शामिल हैं। इन सभी गांवों के निवासियों को अपने विभिन्न सरकारी कार्यों के लिए इसी ग्राम पंचायत पर निर्भर रहना पड़ता है। हालांकि, कार्यालय के समय पर न खुलने के कारण पांचों गांवों के नागरिकों के काम पूरी तरह ठप्प हो गए हैं और प्रशासन की भारी ढिलाई उजागर हुई है।
ग्रामीणों के अधिकारों का हनन
ग्राम पंचायत को गांव के विकास की रीढ़ माना जाता है, ऐसे में कार्यालय को इस तरह बंद रखना नागरिकों के मौलिक अधिकारों पर प्रहार है, ऐसी संतप्त प्रतिक्रिया ग्रामीणों द्वारा व्यक्त की जा रही है। सरकारी योजनाएं, जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेजों के लिए नागरिकों को बार-बार ग्राम पंचायत के चक्कर काटने पड़ रहे हैं, लेकिन हर बार उन्हें निराशा ही हाथ लग रही है जिससे आम जनता बेहद त्रस्त हो चुकी है।
अधिकारियों की मनमानी और फोन बंद
स्थानीय नागरिकों ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि — "यह पहली बार नहीं है। इससे पहले भी कई बार कार्यालय समय से पहले बंद पाया गया है। अधिकारी और कर्मचारी समय पर नहीं आते।" इसके साथ ही, जब नागरिकों ने ग्रामसेवक से फोन के माध्यम से संपर्क करने का प्रयास किया, तो उन्होंने फोन उठाना भी मुनासिब नहीं समझा।
ग्रामीणों ने दी आंदोलन की चेतावनी
इस स्थिति से नाराज नागरिकों में दिनेश सुरु, गणेश हरबडे, मधुकर थेरे, सुरेश हेकाड, अरविंद सोयाम, प्रदीप आत्राम, अजय बल्की, विश्वजीत शेडमाके, अरविंद तुमराम, विक्रम शेडमाके, आशिष राजूरकर, भास्कर अहिरकर, कडू धुर्वे और ग्राम वाशी के अन्य ग्रामीण शामिल हैं। बार-बार होने वाली इस लापरवाही के कारण ग्राम पंचायत की कार्यप्रणाली पर बड़े सवालिया निशान खड़े हो गए हैं। ग्रामीणों ने मांग की है कि संबंधित उच्च अधिकारी तत्काल संज्ञान लेकर जिम्मेदार कर्मचारियों पर कठोर कार्रवाई करें और कार्यालय को नियमित समय पर संचालित करने की गारंटी दें। नागरिकों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि स्थिति में सुधार नहीं हुआ, तो वे सड़कों पर उतरकर तीव्र आंदोलन छेड़ेंगे।

Pratahkal Bureau
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