हाथी संरक्षण के लिए मानव–हाथी सहअस्तित्व जरूरी, प्राचार्य डॉ. उदयकुमार शिंदे
गारगोटी के कर्मवीर हिरे महाविद्यालय में विश्व हाथी दिवस पर मानव–हाथी सहअस्तित्व और संरक्षण का संदेश, भित्तिपत्रक व ऑनलाइन प्रश्नमंजूषा शुरू।

तस्वीर में गारगोटी स्थित कर्मवीर हिरे महाविद्यालय के कक्ष में प्राध्यापक और विद्यार्थी बैठे हैं, जबकि एक प्राध्यापक सामने खड़े होकर प्रस्तुति दे रहे हैं।
गारगोटी स्थित कर्मवीर हिरे महाविद्यालय में ‘विश्व हाथी दिवस’ उत्साह के साथ मनाया गया। इस अवसर पर प्राणीशास्त्र विभाग, विज्ञान मंडल और प्रकृति मंडल के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम में महाविद्यालय के प्राचार्य प्रा. (डॉ.) उदयकुमार शिंदे ने हाथी संरक्षण के लिए मानव–हाथी सहअस्तित्व को समय की आवश्यकता बताया।
प्राचार्य प्रा. (डॉ.) उदयकुमार शिंदे ने कहा, “हाथी केवल जंगल का एक विशाल वन्यजीव नहीं, बल्कि संपूर्ण पारिस्थितिकी तंत्र के संतुलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला पर्यावरणीय अभियंता है। हाथियों का संरक्षण केवल एक प्राणी की रक्षा नहीं, बल्कि वन, जैव विविधता, जलस्रोत और पर्यावरणीय संतुलन का संरक्षण है। इसलिए मानव और हाथियों के बीच संघर्ष पैदा होने के बजाय सहअस्तित्व का मार्ग अपनाना समय की आवश्यकता है।”
कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि वन क्षेत्रों का विखंडन, प्राकृतिक हाथी गलियारों पर अतिक्रमण और बढ़ते शहरीकरण के कारण हाथियों के पारंपरिक आवास पर भारी दबाव बना हुआ है। इसके परिणामस्वरूप भोजन और पानी की तलाश में हाथी मानव बस्तियों और कृषि क्षेत्रों की ओर रुख कर रहे हैं, जिससे मानव–हाथी संघर्ष की स्थिति उत्पन्न हो रही है।
उन्होंने कहा कि इस संघर्ष के लिए केवल हाथियों को जिम्मेदार नहीं ठहराया जाना चाहिए, बल्कि इसके पीछे मौजूद पर्यावरणीय और मानवीय कारणों का वैज्ञानिक दृष्टिकोण से अध्ययन आवश्यक है। हाथियों के आवास को सुरक्षित रखना, जंगलों का संरक्षण करना, स्थानीय समुदायों की भागीदारी बढ़ाना और वैज्ञानिक पद्धति से मानव–हाथी संघर्ष का प्रबंधन करना ही दीर्घकालिक संरक्षण के प्रभावी उपाय हैं।
कार्यक्रम की अध्यक्षता विज्ञान शाखा की समन्वयक डॉ. एम. एस. देसाई ने की। इस अवसर पर प्राणीशास्त्र विभाग की ओर से हाथियों के जीवविज्ञान, पारिस्थितिक भूमिका, मानव–हाथी संघर्ष और संरक्षण के संबंध में विद्यार्थियों में जागरूकता के लिए तैयार किए गए जानकारीपरक भित्तिपत्रक का मान्यवरों के हाथों अनावरण किया गया। साथ ही ऑनलाइन प्रश्नमंजूषा प्रतियोगिता का भी शुभारंभ किया गया।
कार्यक्रम में गणित विभागाध्यक्ष डॉ. एस. एस. खोपडे, प्रा. सी. पी. भगत सहित प्राध्यापक और विद्यार्थी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का प्रास्ताविक प्राणीशास्त्र विभागाध्यक्ष डॉ. एस. ए. व्हनाळकर ने किया। स्वागत प्रा. ज्योती गुरव ने किया। सूत्रसंचालन डॉ. ऋतूजा लाड ने किया, जबकि आभार डॉ. व्ही. ए. जगताप ने माना।

Vijay Morbale, Kolhapur
पद: क्षेत्रीय संवाददाता (कोल्हापुर)
शिक्षा: बी.एससी (केमिस्ट्री), ग्रामीण पत्रकारिता एवं जनसंचार में पीजी डिप्लोमा
परिचय:
विजय गुंडू मोरबाळे महाराष्ट्र के कोल्हापुर क्षेत्र के एक समर्पित और अनुभवी जमीनी पत्रकार हैं। शिवाजी विश्वविद्यालय से बी.एससी (केमिस्ट्री) की डिग्री हासिल करने के बाद, उन्होंने पत्रकारिता के प्रति अपने जुनून को करियर में बदला। उन्होंने शिवाजी विश्वविद्यालय के 'ग्रामीण पत्रकारिता और जनसंचार' कोर्स में सदाशिवराव मंडलिक महाविद्यालय (मुरगुड) में प्रथम स्थान प्राप्त किया है, जो ग्रामीण और स्थानीय मुद्दों पर उनकी गहरी समझ को दर्शाता है।
कार्यक्षेत्र और विशेषज्ञता:
विजय मुख्य रूप से कोल्हापुर जिले के कागल, मुरगुड, अदमापुर और भुदरगड जैसे क्षेत्रों में सक्रिय हैं। 'निकाल न्यूज' जैसे प्रतिष्ठित डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से स्थानीय पत्रकारिता में अपनी पहचान बनाने के बाद, अब वे 'प्रातःकाल' (pratahkal.in) के डिजिटल नेटवर्क से जुड़े हैं। वे स्थानीय राजनीति, सामाजिक सरोकार, अपराध (क्राइम) और क्षेत्र के ऐतिहासिक व धार्मिक मंदिरों से जुड़ी महत्वपूर्ण खबरों को सटीकता से जनता तक पहुँचाते हैं।
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