लातूर में खत्म होगा निष्ठा का 'वनवास'? अमित भैया के 'हनुमान' व्यंकटेश पुरी को क्या अब मिलेगा सम्मान!
लातूर की राजनीति में अमित देशमुख के प्रति अटूट निष्ठा रखने वाले कार्यकर्ता व्यंकटेश पुरी का लंबा इंतजार खत्म हो सकता है। चर्चा है कि उन्हें लातूर नगर निगम में 'स्वीकृत पार्षद' के रूप में बड़ी जिम्मेदारी दी जाएगी। जानिए कैसे एक जमीनी कार्यकर्ता की वफादारी उसे सत्ता के गलियारों तक पहुँचाने के करीब है और क्यों यह खबर लातूर के राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बनी हुई है।

लातूर: राजनीति के गिरते मूल्यों और दल-बदल के दौर में जहां अक्सर वफादारी की बोलियां लगती हैं, वहीं महाराष्ट्र की लातूर विधानसभा और वहां की राजनीति में एक ऐसा नाम उभरकर सामने आया है जिसने 'निष्ठा' की नई परिभाषा गढ़ी है। लातूर के राजनीतिक गलियारों में इन दिनों केवल एक ही चर्चा जोरों पर है कि क्या अपने नेता को ही अपना सर्वस्व मानने वाले 'अवलिया' कार्यकर्ता व्यंकटेश पुरी का वर्षों का संघर्ष अब समाप्त होने वाला है? चर्चा है कि अमित देशमुख के प्रति उनकी अटूट श्रद्धा का फल उन्हें लातूर नगर निगम में 'स्वीकृत' (Co-opted) पार्षद के रूप में मिल सकता है।
व्यंकटेश पुरी के लिए राजनीति केवल सत्ता पाने का माध्यम नहीं, बल्कि अमित देशमुख के प्रति एक अढळ भक्ति है। स्थानीय स्तर पर उन्हें एक ऐसे जुझारू कार्यकर्ता के रूप में जाना जाता है जो पार्टी की हर जिम्मेदारी निभाने से लेकर आंदोलनों के मैदान में सबसे आगे खड़े रहने तक कभी पीछे नहीं हटे। "अमित भैया का आदेश ही मेरे लिए अंतिम सत्य है," यह केवल उनका नारा नहीं बल्कि उनके जीवन का सिद्धांत रहा है। कई बार सत्ता और पद उनके करीब आकर हाथ से निकल गए, लेकिन इस 'अवलिया' कार्यकर्ता ने कभी अपनी निष्ठा नहीं बदली और न ही अपने नेता के फैसले पर सवाल उठाया। उनके इसी धैर्य और संयम की अब लातूर के सत्ता केंद्र में गंभीरता से चर्चा हो रही है।
सोशल मीडिया पर भी व्यंकटेश पुरी के समर्थकों ने एक मुहिम छेड़ दी है, जिसमें मांग की जा रही है कि "सच्ची निष्ठा का सम्मान होना चाहिए।" कार्यकर्ताओं की यह गूंज अब सीधे अमित देशमुख तक पहुंच चुकी है। माना जा रहा है कि अमित भैया अपने इस सबसे भरोसेमंद और 'हक' के सिपाही को लातूर महानगरपालिका में स्वीकृत पार्षद की जिम्मेदारी देकर उनके राजनीतिक वनवास को समाप्त करने का मन बना चुके हैं। यदि ऐसा होता है, तो यह केवल व्यंकटेश पुरी की व्यक्तिगत जीत नहीं होगी, बल्कि उन तमाम जमीनी कार्यकर्ताओं के संघर्ष की विजय होगी जो बिना किसी स्वार्थ के अपने नेता के लिए समर्पित रहते हैं। लातूर की राजनीति में अब व्यंकटेश पुरी का नाम केवल एक कार्यकर्ता का नहीं, बल्कि अटूट वफादारी का पर्याय बन चुका है।

Pratahkal Bureau
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