मुंबई: 28 जनवरी 2026 की तारीख महाराष्ट्र के इतिहास में एक ऐसे काले अध्याय के रूप में दर्ज हो गई है, जिसने न केवल राज्य की सियासत को गहरा जख्म दिया, बल्कि कई परिवारों की खुशियों को हमेशा के लिए छीन लिया। बारामती के आसमान में हुए एक हृदयविदारक हादसे ने पूरे देश को स्तब्ध कर दिया है। इस भीषण विमान दुर्घटना में जहाँ महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार की दुखद मृत्यु हुई, वहीं कर्तव्य निर्वहन करते हुए एक होनहार फ्लाइट अटेंडेंट, पिंकी शिवकुमार माळी ने भी अपनी अंतिम सांस ली। यह कहानी उस जांबाज बेटी की है जिसने अपनी ड्यूटी निभाते हुए अपने प्राण त्याग दिए।

बुधवार का वह दिन पिंकी के लिए एक सामान्य कार्य दिवस की तरह शुरू हुआ था। मुंबई के रनवे से बारामती के लिए उड़ान भरने वाला वह चार्टर्ड विमान (Learjet 45) अपने गंतव्य तक पहुँचने ही वाला था कि नियति ने अपना क्रूर खेल खेल दिया। पिंकी माळी उस विमान में बतौर केबिन क्रू (फ्लाइट अटेंडेंट) तैनात थीं। उनकी जिम्मेदारी थी कि वे वीआईपी मेहमानों की यात्रा को सुरक्षित और आरामदायक बनाएं, लेकिन बारामती एयरपोर्ट के पास विमान के दुर्घटनाग्रस्त होते ही सब कुछ जलकर खाक हो गया। इस त्रासदी में पिंकी, उपमुख्यमंत्री अजित पवार और अन्य सदस्यों की मौके पर ही मौत हो गई।

महज 29 वर्ष की पिंकी माळी सपनों और आकांक्षाओं से भरी एक युवा पेशेवर थीं। विमानन क्षेत्र में उनका करियर पिछले पांच वर्षों से चमक रहा था। वह अपने काम के प्रति बेहद संजीदा थीं और इससे पूर्व देश की प्रतिष्ठित एयरलाइन 'एयर इंडिया' में भी अपनी सेवाएं दे चुकी थीं। मूल रूप से उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले के भैंसा गांव की रहने वाली पिंकी का परिवार वर्तमान में मुंबई के वर्ली इलाके में रहता है। एक छोटे से गांव से निकलकर आसमान की ऊंचाइयों को छूने वाली पिंकी अपने परिवार का गौरव थीं।

पिंकी के पिता, शिवकुमार माळी, जो स्वयं राजनीति में सक्रिय हैं, अपनी बेटी की उपलब्धियों पर गर्व करते थे। लेकिन उन्हें क्या पता था कि मुंबई से बारामती की यह छोटी सी उड़ान उनकी लाड़ली की 'अंतिम यात्रा' बन जाएगी। वर्ली स्थित उनके आवास पर अब केवल मातम और सिसकियाँ हैं। एक पिता के लिए इससे बड़ा दुख और क्या हो सकता है कि जिस बेटी को उसने आसमान में उड़ते देखने के सपने संजोये थे, वह अब कभी लौटकर नहीं आएगी।

इस दुर्घटना ने यह साबित कर दिया है कि जीवन कितना अनिश्चित है। पिंकी माळी की कहानी उस समर्पण और जोखिम का प्रतीक है, जो विमानन कर्मी हर उड़ान के साथ उठाते हैं। विमान का मलबा भले ही बारामती की जमीन पर बिखरा पड़ा हो, लेकिन पिंकी की कर्तव्यनिष्ठा की कहानी हमेशा याद रखी जाएगी। प्रशासन और जांच एजेंसियां अब इस हादसे के कारणों की गहन जांच कर रही हैं, लेकिन माळी परिवार के लिए जो शून्य पैदा हुआ है, उसे शायद कभी नहीं भरा जा सकेगा।

Ruturaj Ravan

Ruturaj Ravan

यह प्रातःकाल मल्टीमीडिया में वेबसाइट मैनेजर और सोशल मीडिया एक्जीक्यूटिव के रूप में कार्यरत हैं, और पिछले तीन वर्षों से पत्रकारिता व डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इससे पूर्व उन्होंने दैनिक प्रहार में वेबसाइट प्रबंधन और सोशल मीडिया के लिए रचनात्मक कंटेंट निर्माण और रणनीतियों में अनुभव अर्जित किया। इन्होंने कोल्हापुर के छत्रपति शिवाजी महाराज विश्वविद्यालय से स्नातक और हैदराबाद के सत्या इंस्टीट्यूट से उच्च शिक्षा पूरी की। इन्हें SEO मैनेजमेंट, सोशल मीडिया और उससे संबंधित रणनीतियाँ तैयार करने में व्यापक अनुभव है।

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