कौन है युगेंद्र पवार? खून के रिश्ते के बावजुद क्यों बारामती में अजित पवार के खिलाफ लढे थे इलेक्शन...
विमान हादसे में अजित पवार के निधन के बाद भतीजे युगेंद्र पवार का वीडियो वायरल हो रहा है। जानिए बारामती में 'काका बनाम भतीजा' की ऐतिहासिक लड़ाई, एनसीपी की बगावत और पवार परिवार के सियासी व पारिवारिक संघर्ष की पूरी कहानी। यह लेख युगेंद्र पवार के उदय और अजित पवार के साथ उनके जटिल रिश्तों का विस्तृत विश्लेषण करता है।

महाराष्ट्र की राजनीति में पवार परिवार का नाम हमेशा से शक्ति और रसूख का पर्याय रहा है, लेकिन आज एक विमान हादसे में उपमुख्यमंत्री अजित पवार के आकस्मिक निधन की खबर ने न केवल सियासी गलियारों को, बल्कि पूरे राज्य को स्तब्ध कर दिया है। इस त्रासदी के बीच, सोशल मीडिया पर अजित पवार के भतीजे, युगेंद्र पवार का एक पुराना वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसने एक बार फिर बारामती में हुई उस ऐतिहासिक 'काका बनाम भतीजा' की लड़ाई की यादें ताजा कर दी हैं। यह वीडियो और आज का घटनाक्रम उस पारिवारिक और राजनीतिक द्वंद्व को रेखांकित करता है, जिसने पिछले कुछ वर्षों में महाराष्ट्र की राजनीति की दिशा बदल दी थी।
युगेंद्र पवार, जो अजित पवार के सगे भाई श्रीनिवास पवार के बेटे हैं, राजनीति में आने से पहले अपनी एक सौम्य और उच्च शिक्षित व्यवसायी के रूप में पहचान रखते थे। पवार परिवार की प्रतिष्ठित शिक्षण संस्था 'विद्या प्रतिष्ठान' में सक्रिय भूमिका निभाने वाले युगेंद्र ने उस वक्त सियासी अखाड़े में कदम रखा, जब परिवार दो फाड़ हो चुका था। जब अजित पवार ने बगावत का झंडा बुलंद करते हुए शरद पवार का साथ छोड़ा, तो युगेंद्र ने अपने सगे चाचा के बजाय अपने दादा, शरद पवार के प्रति वफादारी निभाई। यही वह मोड़ था जिसने उन्हें शरद पवार गुट के एक भरोसेमंद युवा चेहरे के रूप में स्थापित किया और बारामती की उस जंग की नींव रखी, जिसे राजनीतिक पंडितों ने 'विरासत की लड़ाई' करार दिया।
साल 2024 के विधानसभा चुनाव में बारामती सीट पर जो हुआ, वह केवल एक चुनाव नहीं, बल्कि पवार परिवार के भीतर वर्चस्व की लड़ाई थी। इस मुकाबले के पीछे तीन प्रमुख कारण थे, जिन्होंने युगेंद्र को अजित पवार के खिलाफ खड़ा किया। सबसे अहम कारण एनसीपी में हुई बगावत थी, जिसके बाद शरद पवार को अपने अभेद्य किले बारामती को बचाने के लिए परिवार के ही किसी ऐसे सदस्य की जरूरत थी जो अजित पवार को चुनौती दे सके। दूसरा कारण लोकसभा चुनाव की कड़वाहट थी, जहाँ अजित पवार ने सुप्रिया सुले के खिलाफ अपनी पत्नी सुनेत्रा पवार को मैदान में उतारा था; युगेंद्र की उम्मीदवारी को शरद पवार के उसी 'जैसे को तैसा' वाले दांव के रूप में देखा गया। तीसरा और सबसे महत्वपूर्ण कारण शरद पवार की विरासत को सुरक्षित रखना था, ताकि यह संदेश दिया जा सके कि पार्टी और परिवार की अगली पीढ़ी का समर्थन अभी भी वरिष्ठ पवार के साथ है।
हालाँकि, उस चुनाव में युगेंद्र पवार को हार का सामना करना पड़ा और अजित पवार ने भारी मतों से जीत दर्ज की, लेकिन उस चुनावी समर ने युगेंद्र को एक परिपक्व नेता के रूप में पहचान दिलाई। आज जब नियति ने अजित पवार को छीन लिया है, तो वायरल हो रहा युगेंद्र का वीडियो उस दौर की सियासी तल्खी और पारिवारिक रिश्तों की जटिलता को बयां कर रहा है। यह दुखद घटना इस बात की भी याद दिलाती है कि तमाम राजनीतिक मतभेदों और सार्वजनिक विवादों के बावजूद, पवार परिवार की निजी एकता की जड़ें कितनी गहरी रही हैं, जो आज इस शोक की घड़ी में फिर से एक साथ नजर आ रही हैं।

Ruturaj Ravan
यह प्रातःकाल मल्टीमीडिया में वेबसाइट मैनेजर और सोशल मीडिया एक्जीक्यूटिव के रूप में कार्यरत हैं, और पिछले तीन वर्षों से पत्रकारिता व डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इससे पूर्व उन्होंने दैनिक प्रहार में वेबसाइट प्रबंधन और सोशल मीडिया के लिए रचनात्मक कंटेंट निर्माण और रणनीतियों में अनुभव अर्जित किया। इन्होंने कोल्हापुर के छत्रपति शिवाजी महाराज विश्वविद्यालय से स्नातक और हैदराबाद के सत्या इंस्टीट्यूट से उच्च शिक्षा पूरी की। इन्हें SEO मैनेजमेंट, सोशल मीडिया और उससे संबंधित रणनीतियाँ तैयार करने में व्यापक अनुभव है।
