Bandra Terminus encroachment demolition : देश की आर्थिक राजधानी मुंबई के सबसे व्यस्त रेलवे स्टेशनों में से एक बांद्रा टर्मिनस के पास सुरक्षा और बुनियादी ढांचे के विकास को लेकर वेस्टर्न रेलवे ने एक बड़ा अभियान शुरू किया है. बॉम्बे हाई कोर्ट के कड़े आदेश के बाद पश्चिम रेलवे ने बांद्रा ईस्ट के झुग्गी-झोपड़ी वाले इलाकों में रेलवे ट्रैक के किनारे फैले अवैध अतिक्रमणों को जमींदोज करने के लिए पांच दिवसीय महा-अभियान का शंखनाद कर दिया है. आज यानी 19 मई से शुरू हुआ यह विध्वंस अभियान आगामी 23 मई तक लगातार जारी रहेगा, जिसके तहत ट्रैक के किनारे बने लगभग 400 अवैध ढांचों और झुग्गियों को पूरी तरह हटाने का लक्ष्य रखा गया है. इस कार्रवाई के पहले ही दिन रेलवे की जमीन को खाली कराने के लिए भारी मशीनों और सुरक्षाबलों का इस्तेमाल किया गया, जिसने पूरे इलाके में कूटनीतिक और प्रशासनिक हलचल तेज कर दी है.

इस बड़े प्रशासनिक एक्शन का मुख्य उद्देश्य रेलवे की बेशकीमती जमीन को वापस हासिल करना और बांद्रा टर्मिनस पर यात्रियों की सुरक्षा व परिचालन क्षमता में बड़े सुधार करना है. दरअसल, रेलवे ट्रैक के बेहद करीब बसी इन झुग्गियों के कारण न केवल रेल हादसों का खतरा हमेशा बना रहता था, बल्कि कई महत्वपूर्ण विस्तार परियोजनाएं सालों से अधर में लटकी हुई थीं. इस जमीन के मुक्त होने से वेस्टर्न रेलवे यहां सुरक्षा अपग्रेड करने के साथ-साथ बांद्रा टर्मिनस से लगभग 50 नई लंबी दूरी की ट्रेनें शुरू करने की योजना पर काम कर सकेगा. इसके अतिरिक्त, स्टेशन पर नए प्लेटफॉर्मों का निर्माण किया जाएगा और सबसे महत्वपूर्ण रूप से स्थानीय (लोकल) और एक्सप्रेस ट्रेनों के ट्रैक को पूरी तरह अलग किया जा सकेगा, जिससे मुंबई की लाइफलाइन कही जाने वाली लोकल ट्रेनों के परिचालन में देरी की समस्या से बड़ी राहत मिलेगी.

इस पूरे मामले के कानूनी पहलुओं की बात करें तो यह कार्रवाई पूरी तरह न्यायपालिका के संरक्षण और दिशा-निर्देशों के तहत की जा रही है. बॉम्बे हाई कोर्ट ने मामले की गंभीरता और रेलवे की विकासात्मक योजनाओं को देखते हुए इस अतिक्रमण हटाओ अभियान को हरी झंडी दी है. हालांकि, मानवीय दृष्टिकोण को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने पुनर्वास की प्रक्रिया को भी अमलीजामा पहनाया है. इस कार्रवाई के दायरे में आए प्रभावितों में से पात्रता मानदंडों को पूरा करने वाले लगभग 100 पात्र निवासियों को वैकल्पिक आवास मुहैया कराए गए हैं, ताकि उन्हें अचानक बेघर होने से बचाया जा सके. कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए मौके पर रेलवे सुरक्षा बल (RPF), राजकीय रेलवे पुलिस (GRP) और स्थानीय मुंबई पुलिस के सैकड़ों जवानों को तैनात किया गया है, जिसके चलते अब तक पूरी कार्रवाई शांतिपूर्ण ढंग से आगे बढ़ी है.

इस महा-अभियान के दूरगामी परिणाम मुंबई के परिवहन ढांचे को एक नई दिशा देने वाले साबित होंगे. जहां एक तरफ इस जमीन के मिलने से बांद्रा टर्मिनस का कायाकल्प होगा और लाखों रेल यात्रियों का सफर सुरक्षित व सुगम बनेगा, वहीं दूसरी तरफ इस कार्रवाई ने प्रभावित परिवारों के सामने रोजगार और आजीविका का एक गंभीर संकट भी खड़ा कर दिया है. झुग्गियों के टूटने से विस्थापित हुए कई लोगों को अब अपने कामधंधे छिनने की चिंता सता रही है. यह घटना एक बार फिर मुंबई जैसे महानगर में बुनियादी ढांचे के आक्रामक आधुनिकीकरण और हाशिए पर रह रहे नागरिकों के आजीविका संरक्षण के बीच के जटिल द्वंद्व को रेखांकित करती है, जिसका प्रभाव आने वाले दिनों में मुंबई की सामाजिक और ढांचागत राजनीति पर स्पष्ट रूप से दिखाई देगा.

Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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